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लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी पर बौद्ध समाज में गहरा आक्रोश, रजिस्ट्रार के आदेश को राज्य शासन में दी जाएगी चुनौती

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राजनांदगांव। बौद्ध कल्याण समिति, जिला राजनांदगांव के लोकतांत्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित अध्यक्ष दीपांकर खोब्रागढ़े ने रजिस्ट्रार, फर्म एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा पारित अपीलीय आदेश पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा है कि यह निर्णय न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है, बल्कि हजारों वैध सदस्यों के मताधिकार एवं जनादेश पर भी प्रत्यक्ष कुठाराघात है।
दीपांकर खोब्रागढ़े ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि समिति के सदस्यों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उन पर विश्वास व्यक्त करते हुए अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित किया था। यदि उन मतदाताओं के अधिकारों की अनदेखी कर केवल कुछ व्यक्तियों के हित में निर्णय लिए जाएंगे, तो समाज ऐसे आदेश को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश में विस्तृत तथ्यों, साक्ष्यों, कानूनी विश्लेषण एवं सुनवाई की संपूर्ण प्रक्रिया का समुचित उल्लेख नहीं किया गया है। इतने महत्वपूर्ण विवाद का निर्णय अत्यंत संक्षिप्त रूप में दिया जाना अनेक गंभीर प्रश्न खड़े करता है। समाज में यह चर्चा व्यापक रूप से हो रही है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां या प्रभाव थे, जिनके कारण विस्तृत न्यायिक विवेचना के स्थान पर मात्र एक संक्षिप्त आदेश जारी किया गया।
दीपांकर खोब्रागढ़े ने आरोप लगाया कि समाज के कुछ लोग केवल अध्यक्ष पद प्राप्त करने के उद्देश्य से बार-बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को समाज कभी सफल नहीं होने देगा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वैधानिक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विवाद किसी एक व्यक्ति के पद का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वैध सदस्य के मतदान अधिकार, लोकतांत्रिक परंपरा और संगठन की संवैधानिक व्यवस्था का है, यदि लोकतांत्रिक चुनावों को इस प्रकार निरस्त या अप्रभावी किया जाता रहा, तो भविष्य में किसी भी सामाजिक संस्था की निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाएगा।
दीपांकर खोब्रागढ़े ने बताया कि रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों के तहत राज्य शासन के समक्ष अपील/पुनर्विचार की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। साथ ही आदेश के सभी कानूनी एवं प्रक्रियागत पहलुओं को चुनौती दी जाएगी।
उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से शांति, संयम एवं संविधान में विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय कानून और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा। समाज संविधान, विधि के शासन तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण विश्वास रखता है और उसी के अनुरूप अपने अधिकारों की रक्षा करेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक मतदाता के सम्मान, लोकतांत्रिक जनादेश और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए है। समाज इस निर्णय का वैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।