Home छत्तीसगढ़ शक्तिधाम में श्रद्धा और भक्ति से मनाई गई गुरुपूर्णिमा, गुरूदेव हरीश यादव...

शक्तिधाम में श्रद्धा और भक्ति से मनाई गई गुरुपूर्णिमा, गुरूदेव हरीश यादव बोले- गुरू चरित्र निर्माण के शिल्पकार

23
0
Spread the love

राजनांदगांव। शहर के बाबुटोला स्थित शक्तिधाम अघोर शोध एवं जनकल्याण आश्रम में बुधवार, 29 जुलाई को गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक पर्व गुरुपूर्णिमा का आयोजन बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। गुरुदेव हरीश यादव के सानिध्य में हुए इस आयोजन में गुरु पूजन से लेकर भजन-कीर्तन, सफाई अभियान, लेखनी सामग्री वितरण, भजन और वृक्षारोपण जैसे विविध कार्यक्रम शामिल रहे।
प्रातः 8.30 बजे शिष्यों द्वारा गुरुदेव का दुग्ध, गंगाजल, रोली, चंदन गुलाब से अभिषेक किया गया। तत्पश्चात मां काली एवं अघोरेश्वर बाबा की पूजा-अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद गुरुपादुका पूजन और दोपहर 2 बजे तक गुरु पूजन दर्शन का मुख्य आयोजन हुआ, जिसमें दूर.दराज़ से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं और शिष्यों ने भाग लिया। इसी दौरान गुरुदेव हरीश यादव ने शिष्यों को गुरु दीक्षा भी प्रदान की।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी संदेश दिया गया। गुरुदेव श्री यादव ने अपने करकमलों से वृक्षारोपण कर सभी को हरियाली और प्रकृति से जुड़ने का संकल्प दिलाया। इसके पश्चात वे बाबुटोला शासकीय स्कूल पहुँचे, जहां उन्होंने विद्यार्थियों को लेखनी सामग्री वितरित की और गुरु की महत्ता पर प्रेरणादायक संदेश दिया। इसके बाद वरिष्ठ शिष्यों द्वारा नवागंतुक सदस्यों के लिए उद्बोधन कार्यक्रम हुआ, जहां अनुभवों और सेवा कार्यों को साझा किया गया।
शाम 4 बजे गुरुदेव के आशीर्वचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा गुरू चरित्र निर्माण के शिल्पकार। गुरू का वास्तविक कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि चरित्र का निर्माण करना है। ज्ञान मनुष्य को कुशल बना सकता है, परंतु चरित्र उसे महान बनाता है। इतिहास साक्षी है कि जिन व्यक्तियों ने समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी, उनके व्यक्तित्व के पीछे किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन अवश्य रहा। गुरु शिष्य को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देते, बल्कि सत्य, अनुशासन, करुणा, संयम, सेवा और उत्तरदायित्व जैसे जीवन.मूल्यों का संस्कार भी प्रदान करते हैं।
आज के युग में तकनीक और सूचना का अभाव नहीं है, किंतु श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण केवल गुरु के सान्निध्य, प्रेरणा और आदर्शों से ही संभव है। इसलिए गुरु पूर्णिमा केवल सम्मान का पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन में श्रेष्ठ चरित्र निर्माण का संकल्प लेने का अवसर भी है। यही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा है। उन्होंने सभी शिष्यों को जनसेवा में तत्पर रहने और सदकर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की इस कड़ी में शहर के प्रसिद्ध भजन गायक चंद्रेश जैन के भजन में भक्तगण मग्न होकर भक्ति रस में डूबे रहे। पूरे दिन श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और गुरु-भक्ति की भावना से ओत-प्रोत वातावरण का अनुभव लिया।