दुर्ग. जिले के पुलिस कप्तान विजय अग्रवाल इन दिनों ‘डिसीप्लिन’ के मूड में हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी पहनने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप नियमों से ऊपर हैं। एसएसपी के सख्त निर्देश के बावजूद रविवार को शहर की सड़कों पर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन दौड़ाना ९ पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। चेकिंग के दौरान जब ये पुलिसकर्मी बिना हेलमेट पाए गए, तो विभाग ने ‘जी हुजूर’ कहने के बजाय सीधे रसीद बुक निकाली और उनके हाथ में थमा दी।
दरअसल, एसएसपी विजय अग्रवाल ने जिले के सभी थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को स्पष्ट हिदायत दी थी कि वे सड़क पर निकलते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनें। इसके पीछे मंशा यह थी कि पुलिस खुद उदाहरण पेश करे ताकि आम जनता को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा सके। लेकिन रविवार, ४ जनवरी को स्थिति कुछ और ही दिखी। रक्षित केंद्र से लेकर अलग-अलग थानों में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मी बेखौफ होकर बिना सुरक्षा कवच (हेलमेट) के वाहन चला रहे थे।
लाइन से लेकर थानों तक हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आए पुलिसकर्मियों की सूची लंबी है। इसमें रक्षित केंद्र दुर्ग के प्रधान आरक्षक सुशील प्रजापति, अंडा थाने के भागवत प्रसाद, रानीतराई थाने के सुनील साहू, दुर्ग थाने के कमलेश देशमुख, जामुल के पंकज पाण्डेय, और खुर्सीपार के रवि सोनी शामिल हैं। महिला आरक्षक भी इस अनुशासन की रडार से नहीं बच पाईं। भिलाई नगर थाने की संगीता कोसले, छावनी की एलिषा और महिला थाना की आशा ठाकुर पर भी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
जेब से ढीले हुए ५००-५०० रुपए
कार्रवाई के दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले प्रत्येक पुलिसकर्मी पर ५००-५०० रुपये का जुर्माना ठोका गया। इस कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है कि यातायात नियमों की ढि़लाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, फिर चाहे सामने कोई आम शहरी हो या खाकी वर्दी वाला। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि शहर की यातायात व्यवस्था और पुलिस की छवि दोनों को सुधारा जा सके।



