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देव संस्कृति विद्यालय में आत्मरक्षा प्रशिक्षण का आयोजन

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अभय धृतलहरे

महासमुंद.  देव संस्कृति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विगत दिनों  किशोरी बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर बालिकाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे संभावित खतरों से खुद को बचा सकें और अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम में मुख्यअतिथि डॉक्टर एकता लगेह, समाजसेविका और देव संस्कृति शिक्षण समिति अध्यक्ष शशि प्रभा थीटे जी उपस्थित थीं।  इस अवसर पर डॉक्टर एकता जी ने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण का प्रथम उद्देश्य बच्चियों को शारीरिक हमले से खुद को बचाने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा न केवल शारीरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देती है।

शशि प्रभा जी ने बताया कि यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है और हम सबको एकजुट होकर बच्चियों की आत्मरक्षा और अन्य कौशल पर कार्य करने के लिए जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से हम बच्चियों को सशक्त बना सकते हैं और उन्हें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

आत्मरक्षा प्रशिक्षक नीलकंठ साहू ने बताया कि मार्शल आर्ट अनुशासन और एकाग्रता की ओर ले जाता है और यह गुण बच्चों में व्यवस्थित अभ्यास और दोहराव के माध्यम से विकसित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण न केवल शारीरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देती है।

तारिणी चंद्राकर ने बताया कि कराटे अकादमी और समाजिक  संस्था के सहयोग से सभी बड़े स्कूलों में आत्मरक्षा हेतु निशुल्क मार्शल आर्ट, योग और मेडिटेशन की क्लास दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से हम बच्चियों को सशक्त बना सकते हैं और उन्हें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिव्या रंगारी को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया

 

कार्यक्रम का संचालन मार्शल आर्ट प्रशिक्षक नीलकंठ साहू द्वारा और आभार प्राचार्य कुबेर गिरी गोस्वामी द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से नरेंद्र नायक, रामकुमार साहू, तुषार चंद्राकर, जय तंबोली, दूषण साहू ,पत्रकार उत्तरा विदानी और देव संस्कृति विद्यालय के स्टाफ और विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा।

 

आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लाभ

 

– शारीरिक और मानसिक मजबूती

– आत्मविश्वास और जागरूकता

– अनुशासन और एकाग्रता

– शारीरिक फिटनेस और सुरक्षा कौशल

– आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चियों को सशक्त बनाने और उन्हें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना।