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किसान देश का पेट भरता है उसे ही खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है : भुनेश्वर बघेल

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राजनांदगांव। डोंगरगढ़ के पूर्व विधायक भुनेश्वर बघेल ने कहा छत्तीसगढ़ का किसान आज खेत में कम और सरकारी पोर्टल, पंजीयन और टोकन की पेचीदगियों में ज्यादा उलझा दिया गया है, जिस किसान के हाथ में खाद की बोरी होनी चाहिए, उसके हाथ में आज आवेदन, पंजीयन और टोकन की पर्ची थमा दी गई है। भाजपा की तथाकथित डबल इंजन सरकार आखिर किसानों को किस दिशा में ले जाना चाहती है? खाद लेने के लिए नया पंजीयन और टोकन सिस्टम लागू कर सरकार ने किसानों के सामने कृत्रिम संकट खड़ा कर दिया है। गांव-गांव में किसान सुबह से लाइन में खड़े हैं, कोई सर्वर डाउन से परेशान है, तो कोई टोकन खत्म होने से। बुजुर्ग किसान दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, छोटे किसान बिचौलियों के भरोसे मजबूर हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान बोवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में खाद के लिए भटकता रहेगा, तो उत्पादन कैसे बढ़ेगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार जानबूझकर खाद की उपलब्धता सीमित कर रही है, ताकि किसानों का धान उत्पादन कम हो जाए और भविष्य में 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी से बचने का रास्ता तैयार किया जा सके? यदि सरकार की नीयत साफ है तो फिर किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद देने में डर कैसा? पंजीयन और टोकन के नाम पर किसानों को अपमानित और प्रताड़ित क्यों किया जा रहा है?
पूर्व विधायक भुनेश्वर बघेल ने कहा कि किसान कोई प्रयोगशाला का विषय नहीं, बल्कि देश की अन्नशक्ति है, जो किसान देश का पेट भरता है, उसे ही खाद के लिए दर-दर भटकाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और किसान विरोधी मानसिकता का परिचायक है। राज्य शासन तुरंत यह किसान विरोधी आदेश निरस्त करे और किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करनी चाहिए।
पूर्व विधायक भुनेश्वर बघेल ने कहा कि किसान का अपमान नहीं सहेगा छत्तीसगढ़, अन्नदाता को अधिकार दो, टोकन और तंग करने वाली व्यवस्था नहीं।