गरियाबंद. जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल इन दिनों शिक्षा नहीं, बल्कि कुर्सी की जंग के कारण चर्चा में है। निलंबन के बाद बहाल हुई प्राचार्य वंदना पांडे के स्कूल लौटते ही शिक्षकों के बीच खेमेबाजी खुलकर सामने आ गई है। एक पक्ष प्राचार्य के समर्थन में है, तो दूसरा खुला विरोध करता नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कुछ शिक्षक इस पूरे विवाद को तमाशे की तरह लेते भी दिखाई दे रहे हैं।
पूर्वाग्रह और आशंका से ग्रसित कुछ शिक्षक जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंचकर प्राचार्य को हटाने की मांग करने लगे। जब इस संबंध में शिक्षकों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई, तो एक शिक्षिका ने साफ कहा कि वह पूरे स्टाफ के साथ है, जबकि एक अन्य शिक्षक ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया, लेकिन सवालों के ठोस जवाब नहीं दे पाए।
जब स्कूल के बच्चों से सीधे बात की गई तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकली। बच्चों ने बताया कि वंदना पांडे के वापस आने से वे खुश हैं। उनका कहना था कि प्राचार्य की मौजूदगी में स्कूल में अनुशासन रहता है, कामकाज सुचारू रूप से चलता है और पढ़ाई का माहौल बना रहता है।
हालांकि, बातचीत के दौरान कुछ शिक्षक बार-बार वहां पहुंचते रहे, जिन्हें देखकर बच्चे सहम जाते और खुलकर बोलने से कतराते दिखे।पूरा मामला यह सवाल खड़ा करता है कि शिक्षक राजनीति के इस खेल में बच्चों का बौद्धिक और शैक्षणिक भविष्य आखिर किसके भरोसे है? आरोप है कि अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए बच्चों के मन में जहर घोला जा रहा है, जबकि उनकी परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने वाली हैं। यह समय छात्रों के लिए सबसे अहम है, जो उनके भविष्य की दिशा तय करता है।
इस पूरे विवाद पर प्राचार्य वंदना पांडे ने कहा कि मुझे किसी से कोई आपत्ति नहीं है। ज्वाइन करते ही मैंने पूरे स्टाफ की बैठक ली और साफ कहा कि परीक्षा नजदीक है। सभी शिक्षक बच्चों के हित में ईमानदारी से काम करें, ताकि परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत हो।”



