रायपुर. प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में छग आबकारी नीति 2026-26 का अनुमोदन किया गया। इसके तहत अब सरकार ही शराब बेचेगी तथा अन्य कार्रवाई विभाग द्वारा की जाएगी। केबिनेट में पुलिस कमिश्रर प्रणाली लागू करने के बारे में कोई अधिकृत जानकारी नहीं दी गई।
आज केबिनेट की बैठक के बाद केबिनेट मंत्री अरूण साव ने केबिनेट की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में मार्च माह से शुरू होने वाले आबकारी ठेके के लिए नीति वित्तीय वर्ष २०२६ के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है तथा समस्त अनुशांगिक कार्रवाईयों के लिए अधिकृत किया है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में शराब में देसी विदेशी मदिरा बेचने का काम सरकार द्वारा किया जाता है राज्य में करीब सात सौ से अधिक शराब दुकानें संचालित है। इसके लिए सरकार द्वारा राज्य बेवरेच कार्पोरंशन डिस्टीब्युशन कार्पोरेशन एवं फाइनेंस देखने के लिए एक अलग संस्था को काम दिया गया है। इसके लिए एफ एल -2 एफएल 3 शराब के लाइसेंस देने के संबंध में आबकारी विभाग को अधिकृत किया गया है।
राज्य में सरकार को आबकारी विभाग से करीब 12 हजार करोड़ की संभावित आय होती है। इसके अलावा यहां पर शराब दुकानों के लिए संचालन का जिम्मा भी आबकारी विभाग को दिया जाता है शराब की बिक्री के लिए होलमार्क मनाने सहित अन्य कार्य के बारे में सभी कार्य ठेके में कराये जाते है। छग के प्रमुख आसवानी में शराब का निर्माण होता है राज्य में इस समय सरकार द्वारा शराब की दुकान का संचालन किये जाने के कारण शराब महंगी हो गई है छग में इस समय शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। पंचायत स्तर पर अनुमोदन लेकर शराब दुकानें खोली जा रही है।
राज्य में प्रीमियम रेंज की शराब सरकार खरीदेगी। यह खरीदी आबकारी नीति के माध्यम से की जाएगी। राज्य में शराब की बिक्री अपने आप में रिकार्ड है। पंजाब और के रल के बाद अब छग तीसरे नंबर पर है। इस समय शराब की तस्करी भी धड़ल्ले से की जा रही है। पड़ोसी राज्य मप्र तेलंगाना तथा ओडि़शा से शराब की तस्करी की जा रही है। जिससे सरकार को निरंतर घाटा हो रहा है। इधर शराब का ठेका पंद्धति शुरू करने के लिए सरकार पर ठेकेदारों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है लेकिन सरकार इस संबंध में कोई भी निर्णय नहीं ले पाई है।
आर शर्मा



