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संघर्ष और मेहनत की मिसाल: सोनम श्रीवास्तव बनीं मिसेज इंडिया, महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत

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राजनांदगांव। समाज सेवा, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत सोनम श्रीवास्तव आज न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं और बच्चियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। UHFC फाउंडेशन (United Hands For Change) की संस्थापक सोनम ने अपने जीवन का लक्ष्य समाज में शिक्षा का प्रसार और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना बनाया है।

सोनम श्रीवास्तव पाठशाला की डायरेक्टर हैं और पहले ड्रीम इंडिया स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिसेज एशिया, मिसेज इंडिया और मिसेज छत्तीसगढ़ जैसे राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में खिताब अपने नाम किए।

समाज सेवा की शुरूआत बचपन से:
सोनम ने बताया कि उनकी समाज सेवा की यात्रा कक्षा 8वीं में ही शुरू हो गई थी, जब उन्होंने अपने पड़ोस की बच्चियों को पढ़ाना शुरू किया। आज तक उन्होंने 5000 से अधिक बच्चियों को शिक्षा प्रदान की है। वे गरीब बच्चों के लिए फ्री इंग्लिश क्लास संचालित करती हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए मार्गदर्शन देती हैं। इसके अलावा, महिलाओं और युवतियों के लिए पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की कक्षाएं भी लेती हैं।

सफलता की राह में चुनौतियां:
सोनम ने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया। एक समय उनके शरीर में 38 प्रतिशत तक पानी की समस्या हो गई थी। लेकिन मात्र दो महीने में उन्होंने हिम्मत और आत्मविश्वास के बल पर मिसेज ब्यूटी आइकॉन ऑफ इंडिया का खिताब जीता और ब्रेन एंड ब्यूटी अवॉर्ड से सम्मानित हुईं। इसके बाद दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में मिसेज इंडिया का खिताब जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।

प्रमुख सम्मान:

नेपाल के राष्ट्रपति से गैलेक्सी अवॉर्ड

दादासाहब फाल्के अवॉर्ड

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, दिल्ली से वुमन ऑफ द ईयर

नारी रत्न अवॉर्ड

इंडिया की टॉप 30 विजनरी में स्थान

एशिया की टॉप 100 महिलाओं में शामिल

महिलाओं के लिए संदेश:
सोनम ने कहा, “महिलाएं अपनी कमियों से कभी न डरें। लगातार खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करें। सेल्फ ग्रूमिंग, एक्सरसाइज और शिक्षा पर ध्यान दें। जो चीज नहीं आती, उसे सीखें। मेहनत और प्रतिभा ही आपकी पहचान बनती है।”

सोनम श्रीवास्तव न केवल मिसेज इंडिया का खिताब जीतकर गौरव हासिल कर रही हैं, बल्कि समाज सेवा और महिलाओं के सशक्तिकरण में भी मिसाल कायम कर रही हैं।