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विषय बंधन राजपत्र में लागू न होना शिक्षा का अधिकार अधिनियम और नई शिक्षा नीति के प्रावधान का उल्लंघन

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राजनांदगांव। अब लगभग चार माह होने को हैं, जब 30 जनवरी के सीएम के विषयबंधन के निर्णय निर्देश के बाद भी राजपत्र नहीं बदल सका है, इसको बदलने मे प्रदेश के बच्चों को लाभ है। सरकार को कोई आर्थिक बोझ भी नहीं पड़नी है, नई शिक्षा नीति 2020 के ही साथ आरटीई-2009 का भी पालन विषय बाध्यता से होगा। मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान का रथ भी विषयबंधन राजपत्र के बिना आगे बढ़ना कठिन है, किंतु काफी देरी राजपत्र संशोधन मे हो रही है। जल्द विषयबंधन राजपत्र न बदलने और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा बच्चों को न मिल पाने की स्थिति में छग विषय बाध्यता मंच आंदोलन की ओर रुख कर सकती है। ज्ञापन और अनुनय विनय बार-बार सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से कर चुकी है।