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पंचायत सचिव का गुस्सा चरम पर, पंचायत से संबंधित कार्यो को लेकर ग्रामीण जनता हो रही हलाकान

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भानु प्रताप साहू
प्रेमनगर (सूरजपुर)। छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। भाजपा सरकार द्वारा वादा करने के बावजूद पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से प्रदेशभर के 10,959 पंचायत सचिव नाराज हैं। इसी के चलते राजधानी रायपुर के धरना में पंचायत सचिवों ने एक बड़ी सभा आयोजित की और रैली निकालकर विधानसभा का घेराव किया। इसके बाद पंचायत स्तर पर अनिश्चितकालीन कलम बंद आंदोलन शुरू कर दिया गया है।

वादा पूरा न होने पर पंचायत सचिवों में आक्रोश
प्रेमनगर जनपद सचिव संघ के अध्यक्ष कासिम अंसारी ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान भाजपा ने मोदी की गारंटी में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया गया है। प्रदेशभर के पंचायत सचिव अब ब्लॉक मुख्यालयों में काम बंद, कलम बंद आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं। पंचायत सचिव संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

17 महीने बाद भी अधूरा है वादा
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र में वादा किया गया था कि सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाएगा। पंचायत सचिवों ने इस वादे पर भरोसा करते हुए भाजपा सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन सरकार बनने के 17 महीने बाद भी यह वादा अधूरा है, जिससे पंचायत सचिवों में भारी आक्रोश है।
7 जुलाई को पंचायत सचिवों के स्थापना दिवस के अवसर पर आभार एवं आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पंचायत मंत्री विजय शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री एवं विभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। लेकिन इस दौरान पंचायत सचिवों के शासकीयकरण को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। जिससे सचिवों में निराशा और आक्रोश बढ़ गया है।
मांगे अब तक पुरी नहीं होने पर अध्यक्ष कासिम अंसारी, सचिव करीमन सिंह, उपाध्यक्ष रूपनारायण तिवारी, कोषाध्यक्ष जय सिंह, प्रवक्ता साधुचरण साहू, सलाहकार नोहर दास, महामंत्री सोमार साय, कार्यकारिणी सदस्य जय सिंह पैकरा, कलम साय, रामवदन यादव, नरेश प्रजापति, सुनीता सिंह, उर्मिला सिंह, देवपन सिंह आदि ने शासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया है।