दुर्ग। श्री बाबा रामदेव मंदिर गंजपारा दुर्ग में चल रही श्री देवी भागवत कथा के अंतिम दिवस आज कथा वाचक आचार्य राजीव कृष्ण धुलिया महाराष्ट्र द्वारा बनाया गया कि श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण में आदि शक्ति जगदंबा की उपासना के लिए गायत्री मंत्र और नर्वाण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) को ही मुख्य मूल मंत्र व प्राणतुल्य माना गया है।
नर्वाण मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (यह नवअक्षरी मंत्र देवी का सबसे प्रसिद्ध मूल मंत्र है जो समस्त सिद्धियां और कल्याण प्रदान करता है)।
देवी गायत्री मंत्र: ॐ आद्यायै विद्महे महाशक्त्यै च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् (तथा पुराण के एकादश और द्वादश स्कंध में वेदमাতা गायत्री के 24 अक्षरों और उनके विभिन्न तांत्रिक-वैदिक प्रयोगों को ही देवी का सर्वोपरि मूल आधार बताया गया है)।
विशेषताएँ
सर्वोच्च स्थान: सूतजी महाराज के अनुसार जिस प्रकार वेदों व मंत्रों में गायत्री श्रेष्ठ है, उसी प्रकार यह पुराण देवी की महिमा का मूल आधार है।
उपासना का आधार: इस ग्रंथ में भगवती भुवनेश्वरी और आदिशक्ति दुर्गा को ही संपूर्ण सृष्टियों का मूल कारण मानकर इन्हीं के बीज मंत्रों व मूल मंत्रों के जप का विधान बताया गया है।
देवी भागवत कथा के अंतिम दिवस पर आचार्य ने मुख्य रूप से सदाचार, भगवद्-भक्ति और नैतिकता को जीवन का सबसे बड़ा आधार और सफल तरीका बताया।जीवन जीने का सफल तरीका और संदेशसदाचार का पालन: कथा व्यास ने समझाया कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म और मूल मंत्र सदाचार है। जो व्यक्ति अपने आचरण को शुद्ध रखता है, समाज उसका सम्मान करता है।नियमित भक्ति: भगवान की कथाएं और स्मरण मनुष्य के दुखों, भयों और वैचारिक विकारों का नाश करते हैं।कर्म और सेवा: जीवन में अहंकार का त्याग कर माता-पिता, गुरु और समाज की सेवा को ही सच्चा पुरुषार्थ और धर्म माना गया है।
कथा समाप्ति के पश्चात माता जी की भव्य महाआरती की गई। समिति के अध्यक्ष पंकज राठी ने बताया कि दिनांक 20 सितंबर को रात्रि 8 बजे से संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया है जिसमें सुंदर एवं मधुर गीतों के साथ भोले के दीवाने ग्रुप आमगांव महाराष्ट्र द्वारा पाठ किया जायेगा
आज की कथा में अल्का बाघमार महापौर चतुर्भुज राठी मुरारी भूतड़ा मुन्ना दुबे राकेश दुबे अशोक राठी अध्यक्ष माहेश्वरी समाज कुलेश्वर साहू पार्षद रणछोर भूतड़ा सुरेश गुप्ता ओमप्रकाश टावरी कमलेश राजपुरोहित गोविंद गुप्ता विक्रांत दुबे गोलू राठी मयंक राठी लोकेश भूतड़ा एवं सैकड़ों भक्त उपस्थित हुए।



