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बिजली को सेवा नहीं, कमाई का साधन बना चुकी है भाजपा सरकार : अनीस खान

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राजनांदगांव। जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनीस खान ने छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार द्वारा पुनः बिजली दरों में वृद्धि किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह निर्णय आम जनता, किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है। आज जनता महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक संकट से जूझ रही है, ऐसे समय में बिजली महंगी करना जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
अनीस खान ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख विद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल है। बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक कोयला, जल संसाधन, भूमि और उत्पादन की आधारभूत संरचनाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं तथा बिजली का उत्पादन भी यहीं हो रहा है, ऐसे में भाजपा सरकार को जनता को बताना चाहिए कि आखिर बार-बार बिजली दर बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? जब संसाधन भी हमारे हैं, उत्पादन भी हमारा है और व्यवस्था भी स्थापित है, तो उसका लाभ जनता को सस्ती बिजली के रूप में मिलना चाहिए, न कि लगातार बढ़े हुए बिजली बिल के रूप में।
उन्होंने कहा कि क्या भाजपा सरकार ने अब जनता की मूलभूत आवश्यकता बिजली को भी कमाई और मुनाफाखोरी का माध्यम बना लिया है? संविधान की भावना एक लोककल्याणकारी सरकार की है, लेकिन भाजपा सरकार के फैसले लगातार जनविरोधी साबित हो रहे हैं।
अनीस खान ने कहा कि कांग्रेस सरकार और भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना स्वयं भाजपा की असलियत उजागर कर देती है। कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने अपने पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल में केवल एक बार नाममात्र की बिजली दर वृद्धि की थी, जबकि भाजपा सरकार ने अपने मात्र ढाई वर्षों के कार्यकाल में 5 बार बिजली दरों में वृद्धि कर दी है। कांग्रेस सरकार ने हाफ बिजली बिल योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को राहत दी थी, जबकि भाजपा सरकार राहत देने के बजाय लगातार जनता की जेब पर बोझ बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक ओर लाखों घरों में सौर ऊर्जा पैनल लगने और बिजली उत्पादन बढ़ने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर लगातार बिजली दरों में वृद्धि कर रही है। जब उत्पादन बढ़ रहा है, तो बिजली सस्ती होनी चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार जनता को राहत देने के बजाय बिजली को कमाई का जरिया बना चुकी है।
स्मार्ट मीटरों के मुद्दे पर अनीस खान ने कहा कि प्रदेशभर से अधिक बिजली बिल आने, बैलेंस तेजी से समाप्त होने तथा उपभोक्ताओं पर जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। जबकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री स्वयं लोकसभा में स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद पर आधारित हैं। इसके बावजूद प्रदेश में जनता की इच्छा के विरुद्ध स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता के बीच यह धारणा तेजी से बन रही है कि ये स्मार्ट मीटर सुविधा से अधिक वसूली का माध्यम बनते जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर अब जनता के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए स्मार्ट पेटीएम साबित हो रहे हैं, जिनके माध्यम से आम उपभोक्ताओं की जेब से लगातार पैसा निकाला जा रहा है।
अनीस खान ने मांग की कि बढ़ाई गई बिजली दरों को तत्काल वापस लिया जाए तथा स्मार्ट मीटर व्यवस्था को पूर्णतः स्वैच्छिक बनाया जाए, जो उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगवाना चाहता है उसे विकल्प दिया जाए, लेकिन किसी भी नागरिक पर उसकी इच्छा के विरुद्ध प्रीपेड स्मार्ट मीटर न थोपा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली अपनी जनविरोधी नीतियां वापस नहीं लीं तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।