बिलासपुर. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के क्रियान्वयन में हो रही कथित गड़बड़ियों, प्ले स्कूलों की मनमानी और उनके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी करते हुए शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
शिक्षा विभाग के सचिव को स्वयं निगरानी करनी होगी
कोर्ट ने गाइडलाइन तैयार करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तिथि तय की है। सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग के सचिव को स्वयं पूरे मामले की निगरानी करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि सचिव जिलों के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के कामकाज पर नजर रखें और तैयार किए जा रहे दिशा-निर्देशों के संबंध में नया हलफनामा दाखिल करें।
विश्वास है कि सचिव स्वयं अदालत में उपस्थित होंगे
बेंच ने यह भी कहा कि उसे विश्वास है कि सचिव स्वयं अदालत में उपस्थित होंगे। सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने 12 दिसंबर 2025 के पूर्व आदेश के अनुपालन में अपना व्यक्तिगत हलफनामा पेश किया। शपथ पत्र में बताया गया कि राज्य सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 35(2) के तहत विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया में है।
इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। शपथ पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि प्ले स्कूलों के लिए नियामक दिशा-निर्देश तैयार करने को लेकर पांच जनवरी 2026 को रायपुर में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई थी।



