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मुर्गी पालन से बेरोजगारी को दी मात, ग्रामीण युवक बना स्वरोजगार का प्रेरक उदाहरण

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राजनांदगांव। कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छोड़कर मुर्गी पालन में कदम रखने वाले धनेश्वर वर्मा आज ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के एक सफल उदाहरण बन गए हैं। राजनांदगांव जिले के ग्राम विष्णुपुर, गातापार कला के निवासी धनेश्वर वर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से मुर्गी पालन व्यवसाय में सफलता प्राप्त की और अब वे न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

पढ़ाई छोड़ कर मुर्गी पालन की ओर रुख किया
धनेश्वर वर्मा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बी.ए. और आई.टी.आई. तक की और रायपुर में एक प्राइवेट कंपनी में सर्विस इंजीनियर के रूप में काम किया। लेकिन जब कोरोना महामारी ने जॉब बाजार को प्रभावित किया, तो उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौटकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 40 सोनाली मुर्गियां थीं, लेकिन आज उनकी मुर्गी फार्म की संख्या बढ़कर 3000 हो गई है।

मुसीबतों का सामना, फिर भी नहीं हारे
वर्मा बताते हैं कि जब फार्म में बीमारी फैली और मुर्गियां मरने लगीं, तो उन्होंने हार नहीं मानी। मरी हुई मुर्गियों का पोस्टमॉर्टम कराकर डॉक्टर से इलाज करवाया और बीमारी पर काबू पाया। डॉ. तरुण रामटेके के मार्गदर्शन से उन्होंने अपने फार्म की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाया और आज वह सफल मुर्गी पालनकर्ता बन गए हैं।

वर्मा के फार्म में तीन माह में एक किलोग्राम वजनी मुर्गियां तैयार हो जाती हैं। इसके बदले में उन्हें तीन माह में 2.5 लाख रुपये का मुनाफा होता है। और प्रतिमाह 70-80 हजार रुपये की शुद्ध आय होती है।

पशु चिकित्सकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण
जिला पशु चिकित्सालय के डॉ. तरुण रामटेके कहते हैं, “गांव में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन का अभाव होता है। धनेश्वर वर्मा ने मुर्गी पालन में सफलता पाने के लिए जो मेहनत की है, वह दूसरों के लिए एक प्रेरणा है। जो भी मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहता है, उसे पहले कम संख्या में मुर्गियों से शुरुआत करनी चाहिए, फिर धीरे-धीरे बर्ड की संख्या बढ़ानी चाहिए। साथ ही समय-समय पर टीकाकरण और पशु चिकित्सक से मार्गदर्शन लेना जरूरी है।”

स्वरोजगार की ओर एक नई दिशा
धनेश्वर वर्मा की सफलता से न सिर्फ वे स्वयं आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि उन्होंने अपने गांव और आसपास के इलाकों में स्वरोजगार की एक नई राह दिखाई है। आज वह लगभग आधे एकड़ में फार्म बनाकर मुर्गी पालन कर रहे हैं और अपने अनुभवों को अन्य युवाओं के साथ साझा कर उन्हें भी इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

धनेश्वर वर्मा का यह कदम यह साबित करता है कि अगर मेहनत और सही दिशा में काम किया जाए, तो किसी भी व्यवसाय में सफलता मिल सकती है। वह अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।