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पाठ्य पुस्तक वितरण पर मंडरा रहा संकट, डिपो को बंद करने के फैसले का विरोध

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राजनांदगांव। शहर में संचालित पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो को बंद करने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डिपो को यथावत संचालित रखने की मांग की है।
पॉल ने बताया कि राजनांदगांव के डीपों से हर साल 652 संकुलों को करीब 22 लाख सरकारी पुस्तकें वितरित की जाती हैं। इसके अलावा, 615 हाई स्कूलों को 80 हजार, 826 प्राइवेट स्कूलों को 5 लाख और 101 आत्मानंद स्कूलों को 90 हजार किताबें मिलती हैं।

डिपो के बंद होने से फैलेगी अव्यवस्था
क्रिस्टोफर पॉल का कहना है कि यदि डिपो को बंद किया गया तो किताबों के वितरण में अफरा-तफरी मच जाएगी। इससे बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिल पाएंगी और शैक्षणिक सत्र गंभीर रूप से प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि अब जिला शिक्षा अधिकारी को ही वितरण केंद्र खोलने और किताबें बांटने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास न तो इतनी जगह है और न ही पर्याप्त कर्मचारी, जो इतने बड़े पैमाने पर वितरण का काम संभाल सकें।

अब तक नहीं बंटीं सारी किताबें, जबकि अर्धवार्षिक परीक्षा हो चुकी
पॉल ने बताया कि इस वर्ष अब तक कई सरकारी और निजी स्कूलों में किताबों का वितरण पूरा नहीं हुआ है, जबकि अर्धवार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी है। ऐसे में डीपों को बंद करना आने वाले साल में और भी बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि शिक्षा के इस अहम मसले में हस्तक्षेप कर पाठ्यपुस्तक निगम को निर्देशित करें कि राजनांदगांव के डीपों को पूर्ववत चालू रखा जाए, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।