जीएसटी स्लैब को चार से घटाकर दो करने के प्रस्ताव के बाद से ग्राहक व दुकानदार महंगी सामानों को खरीदने से बच रहे हैं। इनका मानना है कि इस हफ्ते टैक्स घटने से इनको भारी फायदा हो सकता है। जिन सामानों की खरीदी कम या पूरी तरह ठप हो गई है, उनमें प्रमुख रूप से वाहन, एसी, फ्रिज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम शामिल हैं। दुकानदारों को डर है कि अभी सामान खरीदने से उनको जीएसटी घटने के बाद सस्ते में बेचना पड़ सकता है।
जीएसटी परिषद इसी सप्ताह 3-4 सितंबर को बैठक करेगी। इसमें मंत्रियों के समूह के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। अंतिम निर्णय के बाद मौजूदा चार स्लैब 5,12,18 और 28 फीसदी में से केवल 5 एवं 18 फीसदी के स्लैब रह जाएंगे। ऐसे में 28 फीसदी वाली वस्तुएं 18 फीसदी के दायरे में आ जाएंगी। इससे उपभोक्ताओं को फायदा की उम्मीद है।
जिन सामानों पर टैक्स घटने की उम्मीद है, उनमें वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर (एसी) और रेफ्रिजरेटर जैसी वस्तुएं हैं। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर नवीन मालपानी ने कहा, जीएसटी 2.0 के लागू होने की तैयारी से ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ता व्यवहार खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों जैसे ऊंचे दाम वाले सामानों में बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राहक देखो और इंतजार करो की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं, वाहन उद्योग का मानना है कि मांग मजबूत है। लेकिन, उन्होंने देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनाई है। निर्णय लेने में देरी से नए वाहनों की बिक्री पर असर पड़ रहा है। उम्मीद है कि सितंबर के पहले सप्ताह के बाद ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा, जिसका असर खरीद-बिक्री की गतिविधियों में देखने को मिलेगा। हालांकि, निकट भविष्य में बिक्री में अस्थायी गिरावट आ सकती है। लेकिन, नई व्यवस्था पर स्पष्टता आने के बाद बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पूरे साल का एक चौथाई राजस्व त्योहार में कमाते हैं। जीएसटी दरों में कमी से त्योहारी सीजन में ग्राहकों को अधिक आत्मविश्वास से खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
ब्रांडों के साथ कंपनियों की चल रही चर्चा
खुदरा विक्रेता बढ़े हुए स्टॉक का प्रबंधन कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों जैसी श्रेणियों में मांग में देरी देखी जा रही है। ई-कॉमर्स कंपनियां अक्तूबर में त्योहारी सीजन के आखिरी चरणों में मांग में संभावित उछाल के लिहाज से तैयारी करने के लिए ब्रांडों के साथ बातचीत कर रही हैं। इन्हें उम्मीद है कि तब तक जीएसटी की नई दर लागू हो गई होगी।
बीमा प्रीमियम का भुगतान भी रोक रहे पॉलिसीधारक
स्वास्थ्य और जीवन बीमा को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की चर्चा है। इससे जिन ग्राहकों को पॉलिसी अभी रिन्यू करानी है, वे इसे रोक रहे हैं। या तो वे एक महीने के लिए रिन्यू करा रहे हैं, या वे फिर इसे टाल भी रहे हैं। नियमों के अनुसार बीमा प्रीमियम तय समय से 15 दिन या एक महीने बाद भी भरा जा सकता है जिस पर कोई जुर्माना नहीं है। हालांकि, इस दौरान किसी भी तरह का दावा स्वीकार नहीं किया जाता है।
त्योहारों में वाहन बिक्री में 10% से कम वृद्धि
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी संतोष अय्यर ने कहा, ग्राहकों को त्योहारी सीजन का बेसब्री से इंतजार रहता है। उम्मीद है कि इस दौरान बिक्री में तेजी आएगी। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितिन मक्कड़ ने कहा, इस साल त्योहारी सीजन में बिक्री में 10 फीसदी से कम वृद्धि रह सकती है। अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के चलते कारोबारी धारणा कमजोर होने की आशंका है।
25-30 फीसदी का होगा असर
आंतरिक अनुमानों के अनुसार, जीएसटी स्पष्टता में देरी होती है तो एसी और रेफ्रिजरेटर जैसे महंगे उत्पादों की बिक्री पर 25-30 फीसदी असर हो सकता है।
यह सतर्क रुख ग्राहकों की इस उम्मीद से प्रेरित है कि नए स्लैब लागू होने के बाद संभवतः दिवाली के आसपास कीमतों में गिरावट आ सकती है। सुधार के बाद 1.2 लाख का स्मार्टफोन 12,000 रुपये तक सस्ता हो सकता है।



