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ब्रह्माकुमारीज आनंद सरोवर बघेरा में “दादी प्रकाशमणि ” जी के पुण्यतिथि का आयोजन

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* ब्रह्माकुमारी की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी के पुण्य स्मृति दिवस पर

* रक्तदान महाअभियान : देशभर में एक लाख यूनिट रक्त संग्रह कर विश्व रिकार्ड बनाने का लक्ष्य…

* कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर विश्व रिकार्ड का हिस्सा बन सकता है…इच्छुक व्यक्ति सम्पर्क करें…

* रक्तदान – जीवनदान है,  यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है … ब्रह्माकुमारी रीटा दीदी 

* रक्तदान शिविर रविवार 24 अगस्त को सुबह 9 से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा…

दुर्ग,(छत्तीसगढ़) :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के बघेरा स्थित आनंद सरोवर में संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनि दादी प्रकाशमणि जी की पुण्यतिथि का आयोजन हुआ इस अवसर पर विजय अग्रवाल एस.एस.पी. दुर्ग ने  पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उपस्थित सभाजनों को समाजिक सुरक्षा व साइबर अपराध की जानकारी दिये।ब्रह्माकुमारी रूपाली दीदी के द्वारा “नशा मुक्त भारत अभियान के तहत उपस्थित लोगों को नशा मुक्त रहने की प्रतिज्ञा कराई गई।

उल्लेखनीय है कि दादी प्रकाशमणि जी के पुण्यतिथि को विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जा रहा है व इस अवसर पर भारत और नेपाल में रक्तदान महाअभियान चलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाया जाएगा। इन्हीं शिविरों की श्रृंखला में जिला चिकित्सालय दुर्ग में 24 अगस्त (रविवार) को प्रातः 9 बजे से 5 बजे तक विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत देशभर के छह हजार से अधिक सेवा केंद्रों से एक लाख यूनिट रक्तदान एकत्रित कर विश्व रिकार्ड बनाने का लक्ष्य है।

ब्रह्माकुमारीज दुर्ग संचालिका रीटा दीदी ने बताया कि इस रक्तदान शिविर का आयोजन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय,इनरव्हीलक्लब व रोटरी क्लब के सहयोग से किया जा रहा है। यह शिविर न केवल रक्त की कमी को पूरा करेगा, बल्कि समाज में मानवता और बंधुत्व की भावना को भी सशक्त करेगा।

उन्होंने बताया कि एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जान बचा सकता है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। इसे केवल इंसान से इंसान को ही दिया जा सकता है। रक्तदान से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय होती है, आयरन लेवल संतुलित रहता है और हृदय रोग का खतरा भी कम होता है।

उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। दादी प्रकाशमणि की पुण्यस्मृति में आयोजित इस शिविर में शामिल होकर सभी को जीवन बचाने के इस महायज्ञ का हिस्सा बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता तथा रक्तदान से 24–48 घंटों के भीतर शरीर में नया रक्त बनने लगता है।