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अखण्ड भारत का संकल्प लिया- रतन यादव

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श्री यादव ने भारत विभाजन की विभीषिका और दंश पर किया संबोधित

दुर्ग। हर वर्ष की तरह इस  वर्ष भी 14 अगस्त को बजरंग दल द्वारा विभाग संयोजक  रवि निगम के नेतृत्व में अखंड  भारत संकल्प  दिवस मनाया गया और विशाल मशाल रैली शहीद चौक से लेकर पटेल चौक तक निकाला  गया जिले भर से आए बजरंगियों ने विशाल रैली के हिस्सा लिया तथा मशाल भगवा झंडा से पूरा वातावरण को भगवमय किया । कार्य क्रम का शुभारंभ भारत माता आरती के बाद  हिंदू वक्ता  प्रफुल्ल ने  अपना उद्बोधन दिया जिसके बाद छत्तीसगढ़ बजरंग दल के प्रांत संयोजक  रतन यादव द्वारा द्वारा भारत विभाजन की विभीषिका और दंश पर सभी बजरंगियों को मंच से संबोधित करते हुए कहा गया कि एक ऐसा दिन जो हमें भारत की प्राचीन सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता की याद दिलाता है। यह केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। अखंड भारत का अर्थ है वह भारतवर्ष जो एक समय में अफगानिस्तान से लेकर बर्मा तक, और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक फैला हुआ था।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि पाकिस्तान का सिंधु क्षेत्र, गांधार और तक्षशिला भारत की वैदिक और बौद्ध परंपराओं का केंद्र था। बांग्लादेश, जिसे प्राचीन काल में वंग और समतट कहा जाता था, चैतन्य महाप्रभु और बंगाली संस्कृति की भूमि रही है। नेपाल और भूटान भारत के हिमालयी क्षेत्र से जुड़े रहे हैं, जहां सनातन धर्म और बौद्ध परंपराएं आज भी जीवित हैं।

श्रीलंका, जिसे रामायण में लंका कहा गया है, भारत के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों से गहराई से जुड़ा है। अफगानिस्तान का गांधार क्षेत्र तक्षशिला विश्वविद्यालय और बौद्ध गुफाओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। म्यांमार (बर्मा) और तिब्बत भी भारत से बौद्ध धर्म, व्यापार और शिक्षा के माध्यम से जुड़े रहे हैं।

इन सभी क्षेत्रों में भारत की संस्कृति, धर्म, भाषा और ज्ञान का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मौर्य, गुप्त, कुषाण और गांधार जैसे साम्राज्य इन भूभागों तक फैले थे। नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में इन देशों के छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे।

आज जब हम अखंड भारत का संकल्प लेते हैं, तो यह केवल सीमाओं को जोड़ने की बात नहीं है, बल्कि संस्कृति, समरसता और राष्ट्र चेतना को पुनः जागृत करने का प्रयास है। यह संकल्प हमें प्रेरित करता है कि हम अपने इतिहास को जानें, अपनी विरासत को सहेजें और भारत को एक सशक्त, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से जागरूक राष्ट्र बनाएं।

इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय कार्य क्रम में मातृशक्ति ज्योति शर्मा दीदी ने भी बड़ी संख्या में अपनी बहनों के साथ उपस्थिति दी गौपुत्र ओमेश बिसेन जी प्रमुख रूप से रायपुर से शामिल हुए अनेक भगवा धारियों के साथ शामिल हुए।संगठन प्रभारी ईश्वर गुप्ता ने अपने जिला एवं विभाग के प्रमुख अधिकारियों इंद्रजीत गोस्वामी, देवाशीष रिशु साहनी घोष,अपूर्व सिंह,ऋषभ जैन,अमित राजपूत,प्रिंस राजपूत के साथ इस कार्यक्रम का संचालन किया।

प्रमुख रूप से प्रांत अध्यक्ष गौतम जैन,उपाध्यक्ष चंदन राजपूत,सह मंत्री विकाश ठाकुर, हृतिक सोनी,कमल साव,करण सोनी, अनिल बेहरा,अजय सेन, ज्ञान साहू,ऋषि कसर,कौशल यादव,लक्ष्मण यादव हंसराज देशमुख,वनील बेहरा, रसपाल सिंग,लोकेश्वर निषाद,संजय यादव ,तोमन वर्मा,जनार्दन पांडे,दीपक कुलकर्णी,विशाल पांडे,आकाश सेन,रॉकी,कमल निषाद,पुकेश्वर निषाद,सूरज साहू,दादू,चुम्मन गोस्वामी, कृष्णा  गोस्वामी,निखिल,,वीरेंद्र पारकर,दूजे पारकर,गोलू,हिमांशु मिश्रा,आदि भारी आख्या में बजरंगी उपस्थित रहे।