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खैरागढ़ जिला पंचायत में वित्तीय घोटाले की परतें उजागर : सालों से बिना बजट करोड़ों की बंदरबांट, ऑडिटर भी बने मूकदर्शक

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छुईखदान। जिला पंचायत खैरागढ़ अंतर्गत छुईखदान जनपद पंचायत में वर्षों से जारी वित्तीय अराजकता अब भारी घोटाले का रूप ले चुकी है। बिना बजट अनुमोदन के ही करोड़ों रुपये योजनाओं, वाहन किराया, चाय-नाश्ता, इलेक्टि्रक रिपेयरिंग जैसे मदों में खर्च कर दिए गए, और हर साल होने वाले ऑडिट में भी इन गंभीर वित्तीय अनियमितताओं पर चुप्पी साध ली गई।
जानकारी के अनुसारए 15वें वित्त आयोग की राशि में व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद गठित जांच दल ने स्पष्ट रूप से पाया कि स्वीकृत राशि से अधिक भुगतान किया गया है। जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत सीईओ को सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे सीईओ प्रेम पटेल की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले में जनपद पंचायत छुईखदान के वर्तमान सीईओ रवि कुमार और पूर्व सीईओ झूमुक सिंह राजपूत के साथ-साथ कई लिपिक और ऑपरेटर भी जांच के घेरे में हैं। जांच प्रतिवेदन में इन अधिकारियों के बयानों का स्पष्ट उल्लेख है, बावजूद इसके जिला प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।
उक्त घोटाले पर दिशा समिति की बैठक में सांसद संतोष पांडे ने भारी नाराजगी जताते हुए सात दिनों के भीतर कार्रवाई का निर्देश दिया था, किंतु एक माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। चर्चा है कि जिला भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के दबाव के चलते जिला प्रशासन हाथ बांधे बैठा है।
छत्तीसगढ़ जनपद पंचायत (बजट अनुमान) नियम 1997 के अनुसार, प्रत्येक जनपद पंचायत को हर वर्ष 30 जनवरी तक बजट अनुमोदन कर 10 फरवरी तक जिला पंचायत को भेजना अनिवार्य है। लेकिन छुईखदान जनपद पंचायत में पिछले छह वर्षों से न तो बजट बनाया गया और न ही अनुमोदन लिया गया। इसके बावजूद करोड़ों रुपये खर्च कर कागजों में बाद में उसे वैध ठहराने का खेल चलता रहा।
लेखा परीक्षण रिपोर्ट में कभी यह उल्लेख नहीं किया गया कि बजट के बिना खर्च किए गए। अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि ऑडिटर की चुप्पी महज लापरवाही नहीं, बल्कि मौन सहमति का परिणाम है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट अब तक तैयार नहीं किया गया है। 80 प्रतिशत निर्वाचित जनपद सदस्यों की लिखित शिकायत के बाद जिला सीईओ ने जनपद सीईओ को 7 दिन की अंतिम चेतावनी दी है। पर सवाल यह है कि वर्षों की गड़बड़ियों को महज चेतावनी से सुधारा जा सकता है?
राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों का कहना है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध है। यदि वर्षों तक बिना बजट पैसा खर्च होता रहा और ऑडिटर चुप रहे, तो यह सिस्टम की विफलता और नए जिले में भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण है।
यह मामला सिर्फ छुईखदान जनपद पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे खैरागढ़ जिला पंचायत की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। यदि अब भी कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो पंचायती व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
सामान्य प्रशासन समिति, जनपद पंचायत छुईखदान ने मांग की है कि 15वें वित्त आयोग के मामले में हुई जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके।