ओमप्रकाश बघेल
(देवभोग समय दर्शन)देवभोग के घुमरगुडा़ में एक दिव्यांग हालातों से जंग लड़ते-लड़ते आज उस दहलीज पर खड़ा है जांहा का रास्ता ना तो अंदर की ओर जाता है और ना ही बहार . वो अपनी जीवन संगिनी के साथ हर उस मुश्किल दौर से लड़ा जब अक्सर लोग लड़ना ही छोड़ देते हैं. लेकिन कुदरत का किस्सा अजीब है. किसी की झोली में बेशुमार खुशियां हैं तो कोई एक अदद सुकून को भी तरसता है. ऐसा ही कुछ देवभोग ब्लाक के घुमरगुडा़ पंचायत के दिव्यांग ओमप्रकाश के साथ बीत रहा है।यूं तो मुश्किलों का दौर उसके लिए कभी कम न था. वो खुद छोटा मोटा काम कर परिवार का पेट पालता था। तो वहीं हमेशा दिलो-दिमाग में दो बच्चो की चिंता लिए घूमता. उसकी दो बच्चे वैष्णवी (10)गोलू(6) फिलहाल काभी छोटे हैं . प्रशासनिक दरियादिली और लोगों की मदद करने की खबरें सामने आती रही पर अब दिव्यांग दर्द,बेबसी और अकेलेपन के प्रकाश हीन अंधकार के चादर मे बिछी बिस्तर पर लेट चूका है।जन्मजात दिव्यांग ओमप्रकाश प्रधान को 7 माह पहले समाज कल्याण विभाग से मिले मोटराइज ट्राय सायकल को चार्ज कर रहा था,चार्जिंग बॉक्स को उठाते ही जोरदार करंट लगा, करंट के झटके ने जमीन पर ऐसा पटका की दिव्यांग के बांये जांघ की हड्डी क्रेक हो गई अब तो कमर भी उठना बंद हो चुका है।दो मासूम बच्चों के साथ पत्नी और मां रहते है परिवार गरीब है,मिले इंदिरा आवास में एक साथ रहते हैं।महिला सदस्य की मजदूरी ही इनके आय का स्रोत है।पीड़िता की पत्नी मिथुला ने कहा की मैं अकेली महिला उठा नही सकती,लाने ले जाने के लिए कोई मदद भी नहीं मिलाता।इलाज में खर्च के लिए फूटी कौड़ी नही है,ना ही जरूरी दस्तावेज है, ऐसे में रात दिन दर्द से कराह रहे पति को घरेलू उपचार के जरिए ही राहत देने की कोशिश हो रही है।दिव्यांग का कहना है प्रसाशन से उचित सहयोग व ईलाज मिले ताकि पुनः जीवन सामान्य हो सके



