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जंगल,झाड़ियों से गुजर रही पदयात्रा जगह-जगह ग्रामीणों का मिल रहा जनसमर्थन

जगदलपुर.  बस्तर की प्राणदानी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए पदयात्रा लगातार तीसरे दिन भी जारी रही.जंगल,झाड़ी,नुकीले कांटे ,कटीले तार और दुर्गम रास्तों से होते हुए पदयात्रा लगातार नदी किनारे से आगे बढ़ रही है.अब तक नदी के रास्ते लगभग साढ़े 22 किलोमीटर का सफर पद यात्रियों ने तय कर लिया है.शुक्रवार को जगदलपुर ब्लॉक के भालूगुड़ा से यात्रा की शुरुआत हुई.जो बकावंड ब्लॉक के रामपाल तक पहुंची,इस बीच लगभग 50 से 60 ग्रामीण पदयात्री यात्रा में शामिल हुये, भालुगुड़ा से रामपाल तक नदी किनारे कई ऐसे मोड़ आए जहां का रास्ता पार करना कठिन था फिर भी पदयात्री थके डरे नहीं और नुकीले कांटे,किसानों द्वारा मवेशियों से फसल को बचाने लगाये गये कटीले तार व झुरमुट के बीच नदी के किनारे यात्रा बढ़ती गई.पदयात्रियों ने कई जगह जलसत्याग्रह भी किया,सबसे आकर्षक नजारा ग्राम रामपाल में देखने को मिला,यहां बड़ी संख्या में आए ग्रामीणों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया,पारंपरिक मोहरी की धुन में पदयात्रियों का स्वागत करते हुए ग्रामीणों ने सभी को फूल मालाएं पहनाई और जलपान की व्यवस्था भी ग्रामीणों द्वारा कराई गई.इस बीच किसान मित्र के लोग भी शामिल रहे.इलाके के ग्रामीणों ने पदयात्रियों साथ जल सत्याग्रह भी किया और इंद्रावती बचाने के इस पहल की सराहना की.रामपाल और आसपास के 7 गांव के ग्रामीणों ने बताया की आज की स्थिति में जल संचय करने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे माध्यम से उनके खेत तक पानी पहुंचाया जा सके. उनका एकमात्र साधन इंद्रावती नदी है.उसी से वे सिंचाई के साथ साथ अपने घरेलू उपयोग के लिए पानी लेते हैं.मगर इंद्रावती नदी के सूख जाने से गांव वालों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष उतना पानी नदी में नहीं बची है जिससे वे अपने खेतों को सिंच सकें,रामपाल,चितालूर,डोंगरीगुड़ा,बालपुटी,नदीघात सहित अन्य गांव के ग्रामीणों ने पानी की व्यथा को पदयात्रियों से अवगत कराया और इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने संकल्प लिया.

शुक्रवार को संपन्न पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी,शहर से पहुंची महिलाओं ने भी अपनी बातें ग्रामीणों के बीच रखी.महिलाओं का कहना था कि लोग ज्यादा से ज्यादा इस अभियान से जुड़े गांव की महिलाओं को भी इस अभियान के लिए सामने आना चाहिए क्योंकि पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता महिलाओं को होती है.घरेलू काम के लिए महिलाएं प्रतिदिन नदी से पानी लेकर घर जाती हैं.ऐसे में आने वाले समय को देखते हुए इंद्रावती नदी को बचाने के लिए हर इंसान को सामने आना चाहिए क्योंकि बिना पानी के कुछ भी संभव नहीं है.जगदलपुर से पदयात्रा करने गए डॉक्टर प्रदीप पांडे ने कहा कि आज के दौर में पानी बचाना अतिआवश्यक है और बस्तर पूरी तरह इंद्रावती नदी पर निर्भर है.नदी में जल ना होने से बस्तर का अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा जरूरत है कि शहर का हर नागरिक इस अभियान से जुड़ें और इंसान की सबसे बड़ी जरूरत पानी को बचाने के लिए आगे आए.पदयात्री संपत झा ने कहा कि लगातार लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं.यह एक अच्छा संकेत है लोग पानी के प्रति जिम्मेदार दिखाई पड़ रहे हैं.पानी के बगैर जीवन अधूरा है इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास होना चाहिए यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है.लोगों को भी आगे आकर बस्तर कि इस अमूल्य धरोहर को बचाने प्रयासरत होना पड़ेगा,पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने कहा कि बस्तर जल जंगल और जमीन के बदौलत विश्वविख्यात है.बस्तर की पहचान इसी से है अगर यही नहीं रही तो बस्तर किस नाम से जाना जाएगा,बस्तर के जल जंगल और जमीन को बचाना सबके लिए एक चुनौती है और यह चुनौती तभी सार्थक होगी जब लोग एकजुट होकर इसके लिए लड़ें,पूर्व निगम अध्यक्ष योगेंद्र पांडे ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए,जल के लिए बड़े-बड़े युद्ध हो चुके हैं ऐसी नौबत यहां ना आए इसे भी ध्यान रखना होगा,जरूरत है सब एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाए ताकि उड़ीसा सरकार बस्तर की जनमानस की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करें,वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन मिश्र ने भी कहा कि बस्तर की प्राणदानी इंद्रावती नदी को बचाने के लिए सामाजिक संगठन,अधिकारी वर्ग बस्तर की जनता को आगे आना चाहिए आने वाला कल नई पीढ़ी का होगा हम उनके लिए पानी बचाने का काम करें,धीरे धीरे बस्तर में जल स्रोत की कमी हो रही है हमारी एक ही धरोहर इंद्रावती बची है.अगर वह भी खत्म हो जाए तो बस्तर पानी के लिए त्राहिमाम करने लगेगा,आदिवासी समाज के अध्यक्ष दशरथ कश्यप का कहना है कि बस्तर के आदिवासी नदियों पर निर्भर हैं उनकी जरूरतों के साथ-साथ खेती में सिंचाई और मवेशी के लिए नदी आवश्यक है और नदी में पानी ही नहीं रहेगी तो बस्तर का आदिवासी क्या करेगा,हम सबको मिलकर बस्तर की संस्कृति को बचाने के लिए प्रयास करना पड़ेगा,बस्तर की नदियों में पानी होगा तो ही बस्तर की संस्कृति बची रहेगी,

चैंबर अध्यक्ष किशोर पारेख ने जानकारी देते बताया की यात्रा की अगली कड़ी में रामपाल से तुरेनार पंचायत के भाटागुड़ा तक पदयात्रा किया जायेगा,8 मई को भेजापदार से शुरू हुई पदयात्रा अब तक साडे 22 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी है.यह यात्रा इंद्रावती नदी मैं बनने वाली विश्व प्रसिद्ध चित्रकूट जलप्रपात तक संचालित होगी,नदी के किनारे पड़ने वाले कई गांव से होकर या यात्रा संपन्न होगी,जगदलपुर शहर में 12 मई को पदयात्रा पहुंचेगी,सुबह 9:30 बजे इंद्रावती नदी के पुराने पुल के नीचे जल सत्याग्रह भी किया जाएगा ताकि सरकार को इस मामले में जगाया जा सके.13 मई से यात्रा आगे की ओर बढ़ेगी,शुक्रवार को रामपाल में संपन्न हुई यात्रा मेंपद्मश्री धर्मपाल सैनी,योगेंद्र पांडे,किशोर पारेख,संपत झा,दशरथ कश्यप,आनंद मोहन मिश्रा,कोटेश्वर नायडू,दिनेश सराफ,मनीष मूलचंदानी,शैलेश अग्रवाल,प्रदीप देंवागन,धरम सोढ़ी,रेखा सैनी,गीता आचार्य,सीमा आचार्य,अनिता भारत,सुशील मौर्य,अमर झा,कमल ठाकुर,डॉ सतीश जैन,सुश्री अनिता राज,अनिल लुंकड,विपिन कुमार तिवारी,कौशल नागवंशी,गोविंद साहू,आर.सी श्रीवास्तव,योगेंद्र कौशिक श्रीनिवास रथ,हेमंत कश्यप,तरुण राठी,सुब्रमण्यम राव,सुरेश बघेल,सुंदरमणि निषाद गंगाराम साहू,उत्तम साहू,पूर्ण ठाकुर,हरेंद्र भारत,रूपक मुखर्जी,आनंद सैनी,यशपाल सिंह,रेखा सैनी,कमला वट्टी प्रीति वानखेडे,टीवी महेश,धर्मेंद्र महापात्रा,रंजीत चक्रवर्ती,गाजिया अंजुम,लक्ष्मी कश्यप,वीरेंद्र महापात्र,गीतेश सिधारे,रोहित आर्य,अनीता श्रीवास्तव,डॉ डी.के पाराशर,राकेश विष्णु,ग्राम रामपाल चितालूर,डोंगरीगुड़ा,बालपुटी से भोले नाथ पांडे,महेश कश्यप,मनीष नाग, धनु राम बृजेश दास,रामनाथ बघेल,सोनू नाग,चंद्रेश राम ठाकुर,रंजन ठाकुर,जय सिंह राठौड़,हरि नाथ,राम गोविंद बघेल,धनंजय ठाकुर,ईश्वर सिंग ठाकुर,गणपति बघेल,अंतु नागे,सुमन बघेल,अरविंद ठाकुर,निंबेश्वर वशिष्ठ चालक नाथ,शिवनाथ ठाकुर,सुखनाथ ठाकुर,सोनू राम ठाकुर,रूप सिंह ठाकुर,प्रेम सिंह ठाकुर,सुरेश कुमार,गीतेश सिंघाड़े,मुकुल ठाकुर,हरि नाथ,महेंद्र सिंह ठाकुर,धरम राम कश्यप सहित अन्य लोग शामिल थे.

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