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नयी सरकार की आस में किसानों के धान नहीं बेचने की खबर को झूठला रहे हैं ये आंकड़े,पिछली बार की तुलना में इस बार किसानों ने बेचे ज्यादा धान,धान उत्पादक जिलों में वोटिंग परसेंटेज में आयी कमी…

समय दर्शन:-  यूं तो प्रदेश भर में सियासी चर्चाएं जोरों पर है कि कांग्रेस सरकार की आस में किसानों ने धान नहीं बेचा है। पिछली बार की तुलना में इस बार ना के बराबर धान की खरीदी हुई है, लेकिन सामने आये एक आंकड़ें उन चर्चाओं को झूठा साबित कर रहे हैं। आंकड़े तो ये बता रहे हैं कि पिछली बार की तुलना में 30 नवंबर तक इस बार 3 लाख मीट्रिक टन ज्यादा धान की खरीदी हुई है। 30 नवंबर तक पिछले साल 9 लाख 35 हजार 130 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी, जबकि इस बार 12 लाख 61 हजार 159 मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है, मतलब 3 लाख 26 हजार 29 मीट्रिक टन । बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, रायगढ़, बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर जैसे जिलों में पिछली बार की तुलना से काफी ज्यादा खरीदी हो चुकी है। हालांकि इन सबमें जांजगीर में धान खरीदी पिछली बार की तुलना में जरूर कम हुई है।

 

इस बार किसानों की नाराजगी को चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने पेश किया। चुनावी दावों में इस बात को कहा गया कि किसान कांग्रेस के साथ है, लिहाजा उन इलाकों में भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है। हालांकि एक और आंकड़ा जो सामने आया है, उसके मुताबिक जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक धान की खेती होती है, वहां पिछली बार की तुलना में कम वोटिंग हुई है।

भरतपुर सोनहत की बात करें तो इस बार 72.88 प्रतिशत ही वोटिंग हुई, जो कि पिछले साल की तुलना में 8.7 फीसदी कम है, वहीं भटगांव में 76.09 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछली बार की तुलना में 3.71 कम है, अंबिकापुर में पिछली बार की तुलना में 2.31 फीसदी कम वोटिंग हुई, सांरगढ़ में भी 2.83 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। वहीं बिलासपुर के मुंगेली, तखतपुर, बिल्हा, मस्तुरी, राजनांदगांव में भी पिछली बार की तुलना में कम वोटिंग हुई।

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