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बजट सत्र का आज आखिरी दिन

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज आखिरी दिन। दोनों ही सदनों की कार्यवाही विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण रही बुरी तरह प्रभावित। 22 दिनों के सत्र में वित्त विधेयक और ग्रेच्युटी भुगतान , विधेयक के पारित होने के अलावा नहीं हो सका कोई और कामकाज।

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज आखिरी दिन है। दोनों ही सदनों की कार्यवाही विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण बुरी तरह प्रभावित रही है। 22 दिनों के सत्र में वित्त विधेयक और ग्रेच्युटी भुगतान , विधेयक के पारित होने के अलावा कोई और कामकाज नहीं हो सका है। कल भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण बाधित रही। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को तैयार है, लेकिन कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दल खुद ही चर्चा को लेकर गम्भीर नहीं हैं।

संसद में गतिरोध कायम तमाम मुद्दों पर विपक्ष का हंगामा सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को तैयारविपक्षी दल खुद ही चर्चा को लेकर गम्भीर नहीं- सरकार एनडीए के सभी सांसद 23 दिनों का वेतन-भत्ता नहीं लेंगे हंगामे के दिनों का नहीं लेंगे वेतन भत्ता। लगातार 21 वें दिन संसद में यही दृश्य दुहराया गया । संसद के दोनों सदनों में गुरुवार को भी गतिरोध बना रहा और विभिन्‍न मुद्दों पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के कारण कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

सबसे पहले बात लोकसभा की जहां कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर AIADMK के सदस्यों के भारी हंगामे के कारण कोई कामकाज नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। हंगामे के बीच ही लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से सदन में व्यवस्था बनाने के लिए अपनी-अपनी सीटों पर जाने की अपील की लेकिन अन्नाद्रमुक सदस्यों ने उनकी अपील को अनसुना कर दिया। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को तैयार है, लेकिन कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दल खुद ही चर्चा को लेकर गम्भीर नहीं हैं।

वहीं राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों के विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चली । सदन की कार्यवाही पहले दो बजे तक और फिर शुक्रवार तक के लिए स्थगित हो गयी । हंगामे के चलते भ्रष्टाचार निवारण संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका। ससंद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से ही लगातार हंगामा हो रहा है और कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां सदन को नहीं चलने दे रही हैं । संसद में काम नहीं हो रहा है इसलिए बीजेपी सहित एनडीए के सभी सांसद उन 23 दिनों का वेतन-भत्ता नहीं लेंगे, जिस दौरान संसद की कार्यवाही हंगामे के भेंट चढ़ गई थी। अनंत कुमार ने संसद के दोनों सदनों में हंगामे के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह लोकतंत्र विरोधी राजनीति कर रही है.। उन्होंने राहुल गांधी पर भी जमकर हमला बोला। हालांकि कांग्रेस ने सरकार के आरोपों से इंकार करते हुए कहा है कि वो हर मसले पर चर्चा को तैयार है ।

बजट सत्र का दूसरा चरण शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। आंकडों पर गौर करें को अब तक लोकसभा में 25 फीसदी और राज्यसभा में 35 फीसदी कामकाज हुआ है । माना जा रहा है कि ये पिछले एक दशक में कामकाज के लिहाज से सबसे खराब सत्र है । आंकडों के मुताबिक संसद में एक मिनट की कार्यवाही का खर्च ढाई लाख रुपये पड़ता है। यानि एक घंटे का खर्च डेढ़ करोड़ रुपये तक आता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस पूरे सत्र में कम कामकाज से देश को करीब 190 करोड़ का नुकसान हुआ है । संसद की कार्यवाही के लिए खर्च किए जाने वाले पैसे जनता की गाढ़ी कमाई से आते हैं यानी सत्र की बरबादी जनता के पैसों की बरबादी है । जनप्रतिनिधियों को जो सैलरी मिलती है वो लोगों की सेवा के बदले में होती है। ऐसे में कई बार सवाल उठते रहे हैं कि जब सदन में कामकाज न हो रहा हो तो क्या वेतन लेना किसी भी रूप में नैतिक है। ऐसे हालांकि दुनिया के किसी देश में ऐसा उदाहरण देखने को नहीं मिला है जहां हंगामे के बाद सैलरी न ली गयी हो ऐसे में सत्ता पक्ष का ये कदम एक नजीर माना जा रहा है ।

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