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मोदी के खिलाफ चुनाव में उतरे बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर का नामांकन रद्द

तेज बहादुर ने कहा- नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया, मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा
तेज बहादुर यादव ने दो नामांकन दाखिल किए थे, पहला निर्दलीय और दूसरा सपा के टिकट पर
पहले नामांकन प्रपत्र में भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त होना स्वीकार किया, दूसरे में इनकार किया
वाराणसी. चुनाव आयोग ने बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव के दोनों नामांकन रद्द कर दिए हैं। तेज बहादुर ने दो नामांकन दाखिल किए थे। पहला निर्दलीय और दूसरा सपा से टिकट मिलने के बाद। सरकारी नौकरी से बर्खास्त होने के बाद तेज बहादुर ने आयोग से चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं ली थी, जो कि आवश्यक होती है। ऐसे में आयोग ने कानूनी सलाहकार मंडल के चर्चा के बाद उसका नामांकन रद्द कर दिया।
तेज बहादुर ने आरोप लगाया- मेरा नामांकन डीएम पर दबाव बनाकर रद्द करवाया गया है। यह गलत तरीके से किया गया है। मुझे मंगलवार शाम सबूत देने के लिए कहा गया था और मैंने ऐसा किया भी। इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया। मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा।
इसलिए रद्द हुआ पहला नामांकन
तेज बहादुर यादव ने वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 24 अप्रैल को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन दाखिल किया। यादव ने नामांकन में लिखा कि उन्हें सरकारी नौकरी के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था। इसके चलते उनका पहला नामांकन रद्द कर दिया गया। दूसरा नामांकन उन्होंने 29 अप्रैल को दाखिल किया। यह सपा से टिकट मिलने के बाद दाखिल किया गया। इसमें उन्होंने अपनी बर्खास्तगी की बात को छिपाया। यह भी लिखा कि पहले नामांकन में बर्खास्तगी की बात मानी थी, जो कि गलत है। दूसरे नामांकन प्रपत्र में तेज बहादुर ने लिखा कि मुझे 19 अप्रैल 2017 को बर्खास्त किया गया है, लेकिन भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा पदधारण के दौरान भ्रष्टाचार एवं अभक्ति के कारण पदच्युत नहीं किया गया है। इस पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस जारी किया था।
जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि दो अलग-अलग नामांकन में तेज बहादुर ने अलग-अलग बातें लिखीं। इससे स्पष्ट होता है कि अभक्ति या भ्रष्टाचार के कारण पदच्युत किए जाने, न किए जाने पर निर्णायक साक्ष्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रमाणपत्र जारी करवाना पड़ता है। प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। दोनों में सही जो भी हो, चुनाव आयोग से लिखित अनुमति चाहिए होती है।
सपा से शालिनी यादव
सपा ने पहले कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुईं शालिनी यादव को वाराणसी में कैंडिडेट घोषित किया था। जिसके बाद उन्होंने नामांकन दाखिल किया। शालिनी का नामांकन जांच के बाद सही पाया गया है। इसी बीच नामांकन के अंतिम दिन 29 अप्रैल को सपा ने अधिकृत टि्वटर हैंडल से तेज बहादुर यादव को सिंबल दे दिया। तेज बहादुर ने दोबारा नामांकन किया। शालिनी यादव खुद को सपा का अधिकृत उम्मीदवार बता रही हैं। वे अपने प्रचार में जुटी हुई हैं।
तेज बहादुर ने सेना के भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे
तेज बहादुर यादव हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले हैं। दो साल पहले 9 जनवरी, 2017 को उन्होंने सेना में परोसे जा रहे भोजन का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था। जिनमें सिर्फ हल्दी-नमक वाली दाल और साथ में जली हुई रोटियां दिखाते हुए खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा समेत कई स्थानों पर घटिया क्वॉलिटी का खाना दिया जाता है। कई बार जवानों को भूखे पेट सोना पड़ता है।
जांच के बीच अनशन पर बैठे थे तेज बहादुर
प्रधानमंत्री कार्यालय ने गृह मंत्रालय और बीएसएफ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इस बीच तेज बहादुर ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन कर दिया, जिसे बीएसएफ ने स्वीकार नहीं किया। तेज बहादुर को निर्देश दिया गया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, वह बीएसएफ नहीं छोड़ सकते। विरोध में तेज बहादुर राजौरी स्थित मुख्यालय में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। 19 अप्रैल 2017 को अनुशासन तोड़ने के आरोप में तेज बहादुर को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया।

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