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क्या आप जानते हैं कि देश के इन मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर है पाबंदी

समय दर्शन:- नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया है। लेकिन इसके साथ ही आपको यह भी बता दें भारत में कई ऐसी धार्मिक जगहें हैं, जहां महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित है, उन्हें अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में ऐसे मंदिर भी हैं जहां पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

भगवती मंदिर – कन्याकुमारी के इस मंदिर में भगवती के कन्या रूप की पूजा होती है। इस मंदिर में पुरुष परिसर तक में नहीं जा सकते।

 <strong>भगवती मां मंदिर , कन्याकुमारी</strong><br />कन्याकुमारी के इस मंदिर में भगवती के कन्या रूप की पूजा होती है. इस मंदिर में पुरुष परिसर तक में नहीं जा सकते. अलबत्ता संन्यासी पुरुष मंदिर के द्वार तक जा सकते हैं. 

संतोषी मां – संतोषी मां का व्रत महिलाएं और कुंवारी लड़कियां ही रखती हैं। बेशक पुरुष संतोषी मां की पूजा तो कर सकते हैं लेकिन शुक्रवार को संतोषी मां के किसी भी मंदिर में उनका प्रवेश वर्जित होता है।

 <strong>संतोषी मां मंदिर</strong><br />संतोषी मां का व्रत महिलाएं और कुंवारी लड़कियां ही रखती हैं. इस समय उन्हें खट्टी चीज़ें खाने की अनुमति नहीं होती. बेशक पुरुष संतोषी मां की पूजा तो कर सकते हैं लेकिन शुक्रवार को संतोषी मां के किसी भी मंदिर में उनका प्रवेश वर्जित होता है.

कामरुप कामाख्या मंदिर- असम में स्थित इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान यहां पुरुषों के प्रवेश पर रोक रहती है। इस दौरान केवल महिला संत और संन्यासिन मंदिर की पूजा करती हैं।

 <strong>कामरूप कामाख्या मंदिर, असम</strong><br />ये मंदिर केवल महिलाओं को मासिक धर्म चक्र के दौरान परिसर में प्रवेश की अनुमति देता है. केवल महिला पुजारी या संन्यासी मंदिर की सेवा करते हैं, जहां मां सती के मासिक धर्म को बहुत शुभ माना जाता है और भक्तों को वितरित किया जाता है.<br />ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र के साथ मां सती को काट दिया था जिसके कारण उनकी कमर उस स्थान पर गिर गया, जहां मंदिर बनाया गया था.

चक्कूलाथूकावु मंदिर- केरल के इस मंदिर में देवी भगवती की पूजा होती है। यहां ‘नारी पूजा’ नामक वार्षिक अनुष्ठान होता है जिसमें पुरुष पुजारी उन महिला भक्तों के चरण धोते हैं, जिन्होंने 10 दिनों से व्रत रखा होता है। इस दिन को धनु कहते हैं। नारी पूजा के दौरान केवल महिलाओं को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत होती है।

 <strong>छक्कूलाथुकावु मंदिर , केरल</strong><br />छक्कूलाथुकावु मंदिर में महिलाओं की पूजा होती है. यह मां भगवती का मंदिर है जो दुर्गा का अवतार मानी जाती हैं. यहां के पुरुष पंडित दिसंबर के महीने में महिलाओं के लिए दस दिन का उपवास रखते हैं और पहले शुक्रवार को महिला श्रद्धालुओं के पैर धोते हैं. इस दिन को धनु कहा जाता है. नारी पूजा के दिनों में पुरुषों का प्रवेश यहां वर्ज़ित है.

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