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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दी तीन तलाक विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार तीन तलाक देने वाले व्यक्ति को जमानत पर रिहा करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार तीन तलाक देने वाले व्यक्ति को जमानत पर रिहा करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। मामले में पीडिता और उसके रक्तसंबंधियों को FIR दर्ज कराने का हक होगा। केन्द्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रिमंडल ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक में तीन संशोधनों को मंजूरी दी है।

मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक देने बाले ट्रिपल तलाक बिल में कुछ व्यहारिक संशोधनो को मंजूरी दे दी है। गुरूवार को हुई केन्द्रीय कैविनेट की बैठक में मौजूदा बिल में 3 संशोधनों को मंजूरी दी गई है। इसके अनुसार ट्रिपल तलाक के मामले में पीडित पत्नी या उसके करीबी रिश्तेदारों द्दारा ही एफआईआर दर्ज कराई जा करेगी, कोई पड़ोसी या अन्य व्यक्ति एफआईआर कराने का हकदार नही होगा।

दूसरे संशोधन के तहक ट्रिपल तलाक देने के बाद अगर पति समझौता करने को तैयार है तो मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद समझौते की अनुमति दी जा सकती है लेकिन इसका फैसला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पत्नी की सहमति के बाद ही हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्रिपल तलाक गैर जमानती अपराध ही रहेगा लेकिन तीसरे संशोधन के तहत सरकार ने कहा है कि मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है इसका मतलब है कि थाने से आरोपी को जमानत नही मिलेगी बल्कि आरोपी को कोर्ट में मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकता है। पीडित पत्नी को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार दिया गया है।

रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि मीडियो खबरों के मुंताबिक ट्रिपल तलाक पर अदालत का फैसला आने के बाद से अब तक 389 मामले सामने आ चुके है। 1 जनवरी 2017 से 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक 229 मामले सामने आ चुके थे जबकि फैसला आने के बाद से 23 जुलाई 2018 के बीच 160 मामले सामने आ चुके है। रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोलते हुए सोनिया गांधी से ट्रिपल तलाक पर अपनी राय स्पष्ट करने को कहा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वो मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान के साथ समझौता नही कर सकती है हालांकि बिल से संबंधित जो भी सार्थक सुझाव सामने आयेगे उस पर विचार करने के लिये सरकार पूरी तरह से तैयार है जिसका उदाहरण हालिया 3 संशोधन है। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द इस बिल को संसद की मंजूरी के बाद कानून की शक्ल दी जा सके।

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