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नवरत्न से आगे बढ़कर नए भारत के रत्न बनें: पीएम

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने केन्‍द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से अपील की है कि वे नवरत्न से आगे बढ़कर नए भारत के रत्न बनें। उन्‍होंने साथ ही कहा इन उपक्रमों को व्यवहारिकता, उद्यमशीलता और नवोन्मेष के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने केन्‍द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से अपील की है कि वे नवरत्न से आगे बढ़कर नए भारत के रत्न बनें। कल नई दिल्‍ली में उपक्रमों के सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि इन उपक्रमों को व्यवहारिकता, उद्यमशीलता और नवोन्मेष के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि ‘ न्यू-इडिया’ के निर्माण में ये उपक्रम अपनी उचित भागीदारी निभा सकें। प्रधानमंत्री ने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अर्थव्यस्था को मजबूती देने का काम कर रहे हैं ऐसे में उनके कर्मचारियों के योगदान को नहीं भुला जा सकता है।

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम यानी सीपीएसई के सम्मेलन में पहुंचे पीएम मोदी ने न केवल इनकी सराहना की बल्कि इन उद्यमों के वरिष्ठ अधिकारियों को तमाम मंत्र दिए । पीएम ने कहा कि देश आज सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों को नवरत्न के रुप में जानता है लेकिन आज जरुरी है कि इनको नवरत्न नहीं New India रत्न बनाएं । इसके लिए तकनीक और प्रक्रियाओं में बदलाव की जरुरत होगी । प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अर्थव्यस्था को मजबूती देने का काम कर रहे हैं ऐसे में उनके कर्मचारियों के योगदान को नहीं भुला जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यक्रम में भी सार्वजनिक उपक्रम डटे रहते हैं।

प्रधानमंत्री ने न्यू इंडिया रत्न बनाने में 5 पी का मंत्र अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि पऱफॉरमेंस , प्रोसेस , परसोना , प्रोक्योरमेंट यानी खरीद और प्रिपेयर यानी तैयारी अहम है। पीएम ने कहा कि निजी क्षेत्र हो या फिर सार्वजनिक क्षेत्र सफलता के मंत्र सबके लिए एक ही होते हैं । पीएम ने कहा कि जब वो सफलता के मंत्र की बात करते हैं तो 3 आई की सोच सामने आती है। पीएम के मुताबिक कर्मचारियों के लिए इंसेटिव जरुरी है भले ही वो पैसे के रुप में हो या उन्हें उत्साहित करने के लिए कोई और तरीका। पीएम के मुताबिक आने वाले वक्त के साथ तकनीकी बदलाव जरुरी है और उसके लिए इमैजिनेशन जरुरी है । साथ ही व्यक्ति केंद्रित और व्यक्ति आधारित व्यवस्थाएं लंबे समय तक नहीं चल पातीं इसलिए संस्थान बनाने पर ही जोर हो ।

पीएम ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इन उद्धमों के जरिए ही सरकार बड़े-बड़े फैसले ले पाने में सक्षम है। फिर वो चाहे देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने की बात हो या फिर गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन । प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक फैसले लेने में आदर्शवाद और विचारधारा की जगह व्यावहारिकता और तथ्यात्मकता को भी स्थान मिलना चाहिए। पीएम मोदी ने पीएसयूज को उद्धमिता और इनोवेशन पर भी जोर देने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में चर्चा है कि भारत 5 ट्रिलियन इकॉनमी बनने जा रहा है। इस जीडीपी को हासिल करने में पीएसयू को अहम भूमिका है। पीएम ने आजादी के 75 साल यानी 2022 तक पीएसयूज के लिए कुछ अहम लक्ष्य भी सामने रखे। इनमें 2022 तक भारतीय पीएसयू को अपनी वैश्विक रणनीतिक पहुंच बढाने , देश का आयात बिल कम करने में मदद करने , आपस में रिसर्च और इनोवेशन का इंटीग्रेशन करने, न्यू इंडिया के सपने के मुताबिक सीएसआर फंड का सही इस्तेमाल करने और विकास के नए मॉडल देश को देने की चुनौती रखी। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि पीएसयूज सेवा को केंद्र में रखकर न्यू इंडिया के विकास में मददगार होंगे ।

प्रधानमंत्री ने ऐसे उपाय करने को कहा जिससे देश के लघु और छोटे उद्योगों से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदने और उन्हें समय से भुगतान करने को कहा । पीएम ने कहा कि नीति आयोग ने देश के 115 सबसे पिछड़ों जिलों की पहचान की है और इन जिलों को इस वर्ष की थीम बना सकते हैं । पीएम ने अधिकारियों को तमाम बातें बताईं तो अंत में उनके सामने लक्ष्य भी रखा कि सम्मेलन में जो बातें रखी गयी हैं 100 दिन बाद उनका रोडमैप पेश करके फिर से बैठक की जाए । यानी पीएम ने न के केवल पीएसयूज के कार्यक्रमों को जाना बल्कि उनको पूरा करने का लक्ष्य भी सामने रख दिया ।

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