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15वां वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट के लिए राज्यों से लेगा सलाह

रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग अप्रैल से राज्यों के साथ बातचीत शुरू करने जा रहा है और शुरुआत अरुणाचल और जम्मू कश्मीर से होगी

केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए वित्त आयोग की सिफारिशें उनकी वित्तीय योजनाओँ पर खासा असर डालती हैं। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें अगले आम चुनावों के बाद की सरकार के लिए काफी मायने रखती हैं। आयोग को अक्टूबर 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं। खास बात ये है कि योजना आयोग के ख़त्म होने के बाद पहली बार वित्त आयोग बदले हुए माहौल में अपनी रिपोर्ट देगा। जीएसटी के असर को भी आयोग अपने रिपोर्ट में शामिल करेगा जो राजस्व में बढ़ोत्तरी कर सकता है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग अप्रैल से राज्यों के साथ बातचीत शुरू करने जा रहा है और शुरुआत अरुणाचल और जम्मू कश्मीर से होगी। इसमें राज्यों को उनके प्रदर्शन के आधार पर राजस्व की हिस्सेदारी दिए जाने का प्रस्ताव है

देश में टैक्स के जरिए होने वाली आमदनी को केन्द्र राज्य और स्थानीय निकायों में बंदवारे की सिफारिश करने वाले वित्त आयोग ने सभी के साथ विचार विमर्श का काम शुरु कर दिया है। देश भर में राज्य सरकारों से मुलाकात कर उनकी प्राथमिकताएं जारी करने का काम अप्रैल में शुरु कर दिया जाएगा। आयोग को अक्टूबर 2019 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं। ये रिपोर्ट केन्द्र में नई सरकार के पहले बजट पर अपना खासा असर डालेंगी। दरअसल 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें कई मायनों में खास होने जा रही हैं

राज्यों में 50 अलग अलग मुद्दों पर आय़ोग अपनी रिपोर्ट पर काम कर रहा है। आईएमएफ और ओईसीडी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ विचार विमर्श के जरिए भी वैश्विक स्तर के विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। एक खास बात ये भी है कि वित्त आयोग आपदा प्रबंध में किए जाने वाले खर्चों के लिए भी विशेष सिफारिशें कर सकता है। नए भारत के निर्माण के लिए सरकार की प्राथमिकताओं के मद्देनजर आयोग इस बात का भी पूरा खयाल रखने की कोशिश करेगा कि राज्यों को उनकी वित्तीय स्वायत्तता में कोई व्यवधान नजर न आए।

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