Entertainment

हकीकत से कोसों दूर है फिल्म, घिसी-पिटी कहानी में भी दिखाई देती है टाइगर श्रॉफ की मेहनत

स्टार रेटिंग 3/5
स्टारकास्ट टाइगर श्रॉफ, तारा सुतारिया, अनन्या पांडेय
निर्देशक पुनीत मल्होत्रा
निर्माता करण जौहर, हीरू यश जौहर, अपूर्व मेहता और फॉक्स स्टार स्टूडियोज
जॉनर ड्रामा
अवधि 145 मिनट
बॉलीवुड डेस्क. स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 करण जौहर द्वारा निर्मित प्रस्तुत एक और कैम्पस लव स्टोरी है। इस फिल्म के निर्देशक पुनीत मल्होत्रा हैं। यह फिल्म 2012 में आई स्टूडेंट ऑफ द ईयर की सीक्वल है जिसे करण जौहर ने खुद निर्देशित किया था और इस फिल्म से आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने डेब्यू किया था।
5 पॉइंट में समझें कैसी है फिल्म?
पुरानी फिल्म की तरह है कहानी
स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 में टाइगर श्रॉफ तारा सुतारिया और अनन्या पांडेय के साथ नजर आ रहे हैं जिनकी यह डेब्यू फिल्म है। टाइगर रोहन नाम के लड़के के किरदार में हैं जो कि एक मिडिल क्लास फैमिली से है और एक साधारण से कॉलेज में पढ़ता है। जब रोहन के बचपन का प्यार मृदुला (तारा सुतारिया) शहर के एक नामी कॉलेज में एडमिशन ले लेती है तो स्कॉलरशिप के सहारे रोहन भी उसी कॉलेज में पढ़ने लगता है।
यहां रोहन की मुलाकात होती है श्रेया(अनन्या पांडेय) और मानव (आदित्य सील) से जो कि बिगड़ैल हैं। कहानी में एक मोड़ तब आता है जब रोहन को कॉलेज से निकाला जाता है और वो समझ जाता है के कौन उसके दुश्मन है और कौन असली दोस्त। पिछली फ़िल्म की तरह इस फिल्म में भी स्टूडेंट्स का लक्ष्य स्टूडेंट ऑफ द ईयर की ट्रॉफी पाने का होता हैऔर यह बताने की ज़रूरत नहीं कि आख़िर में उसे कौन जीत कर जाता है। फिल्म की कमजोर कड़ी यही है कि आपको पहले ही पता होता है कि आगे क्या होने वाला है।
हकीकत से कोसों दूर है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी और उसके एक्जीक्यूशन में ओरिजिनैलिटी की कमी दिखती है और ऐसा लगता है बस किरदार बदले हैं और बाक़ी सब पहले जैसा है। सेंट.टरीसा कॉलेज जिसके स्टूडेंट्स क्लास में बहुत कम और बाहर नाचते-गाते ज़्यादा दिखते है, जहां पढ़ाई कम और लड़ाई ज्यादा दिखाई देती है और जहां टीजर्स, कोच (गुल पनाग) और ख़ुद प्रिन्सिपल ( समीर सोनी) को कॉमिक किरदारों की तरह बनाया गया हो तो शुरू से ज़ाहिर हो जाता है कि कॉलेज तो बस एक बहाना है निर्देशक कहानी से ज़्यादा अपने हीरो के डांसिंग और फ़ाइटिंग टैलेंट को दिखाने में ज्यादा दिलचस्पी रखते है।
टाइगर की स्क्रीन प्रेजेंस बढ़िया, अनन्या की एक्टिंग भी नैचुरल, तारा ने किया निराश
टाइगर श्रॉफ़ पहले भी हमें अपनी कमाल की स्क्रीन प्रजेंस दिखा चुके है। निर्देशक इस फ़िल्म में भी उन्हें नाचते, दौड़ते,फाइट करते और उनके सिक्सपैक एब्स दिखाते ज्यादा नजर आते हैं। रोहन का किरदार अच्छा है और टाइगर उसे बहुत अच्छे से निभाते हैं। अनन्या पांडेय इम्प्रेस करती हैं और उनकी एक्टिंग लगती है। तारा सुतारिया निराश करती हैं। अगर वह बॉलीवुड में लंबी पारी खेलना चाहती हैं तो उन्हें अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्टिंग पर काम करने की बहुत ज्यादा जरुरत है। फ़िल्म के बाक़ी किरदारों की बात करें तो मनोज पहवा, मानसी जोशी रॉय, आएशा राजा अच्छे हैं लेकिन निर्देशक अपने लीड किरदारों के ऊपर इतना कॉन्सेंट्रेट करते है कि बाक़ी सबको कुछ ज़्यादा करने का मौक़ा ही नहीं मिलता है।
बेदम म्यूजिक
फिल्म का म्यूज़िक भी निराशाजनक है। स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर का म्यूज़िक हिट रहा था पर इस फिल्म के म्यूज़िक में वो बात नहीं है। दोनों फिल्मों में विशाल-शेखर का ही म्यूजिक है।
टाइगर के लिए देखिए
यह फिल्म शायद टीनएजर्स को पसंद आए लेकिन कुल मिलाकर निराशाजनक है। इसे देखिए अगर आप टाइगर श्रॉफ़ के फ़ैन हो। उनकी मेहनत इस फिल्म में भी दिखाई देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *