Chhattisgarh

60 दिन की जगह 4 साल बाद खाते में आई लोन की सब्सिडी, तब तक 7 लाख हो चुका था ब्याज

लैलूंगा के व्यवसायी ने मसाला उद्योग शुरू करने एसबीआई से लिया था 19 लाख लोन
अब पत्नी-बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठा, केंद्र सरकार ने शुरू की है स्कीम

रायगढ़. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में लोन लेने वाले युवा सब्सिडी को लेकर पेशोपेश में हैं। इसकी वजह समय पर बैंक खाते में सब्सिडी का न पहुंचना है। ऐसे ही एक मामले में लैलूंगा के युवा व्यवसायी अनिरुद्ध गुप्ता ने 4 साल पहले योजना में 19 लाख रुपए का लोन लिया था। योजना के मुताबिक उन्हें 60 दिन में 25 फीसदी सब्सिडी मिलनी थी, पर सब्सिडी 4 साल बाद उनके खाते में आई। तब तक ब्याज ही 7 लाख रुपए हो गया। परेशान होकर सोमवार को अनिरुद्ध गुप्ता कलेक्टोरेट के सामने अपने परिवार सहित धरने पर बैठ गया।
बैंक ने लोन दिया, पर उद्योग विभाग ने सब्सिडी देने में की देरी

केंद्र सरकार ने 11 साल पहले छोटे और मंझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना की शुरुआत की थी। इसमें छोटे व्यवसायियों व दुकानदारों व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार की गारंटी पर बैंकों से लोन दिलाया गया, क्योंकि छोटे दुकानदार व्यवसाय को बढ़ाने बैंक को गारंटी नहीं दे सकते थे। छोटे व्यवसायियों को आर्थिक मदद के साथ सब्सिडी भी देने का प्रावधान है।

लैलूंगा निवासी अनिरुद्ध गुप्ता ने इस योजना में लोन के लिए अप्लाई किया। 4 साल पहले उन्हें 19 लाख रुपए लोन मिला। बैंक ने उन्हें लोन तो दे दिया,पर उद्योग विभाग से मिलने वाली सब्सिडी खाते में चार साल बाद जमा की। ऐसे में ब्याज के कारण लोन अधिक हो गया। अनिरुद्ध का कहना है कि लोन की किस्त चुकाने में उनकी माली हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी है। ऐसे में उन्होंने सपरिवार कलेक्टोरेट के सामने धरना देने को मजबूर हो गए।

कहा था दो माह में आ जाएगी सब्सिडी

अनिरूद्ध ने बताया कि व्यावसायिक लोन लेने के बाद उनसे कहा गया था कि खाता खुलवाने के साथ ही सब्सिडी खाते में आ जाएगी। इसके बाद जब लोन मिला तो फिर से उन्हें कहा गया कि दो माह बाद सब्सिडी जाएगी। ऐसा करते-करते काफी दिन बीत गए पर सब्सिडी नहीं मिली। इधर वे किस्त चुका रहे थे। उनका कहना है कि यदि सब्सिडी की राशि समय पर आती तो लोन भी चुकता हो चुका होता। अब यदि वे लोन की पूरी राशि भी जमा कर दें तो फिर उनकी सब्सिडी का क्या होगा।

सब्सिडी समय पर नहीं देने वाली बैंकों को बड़ा मुनाफा होता है। लोगों से पूरी रकम लेने के बाद वे उसका उपयोग दूसरे कामों में करते हैं। इसके अलावा उनके खातों में रकम देरी से पहुंचे तो उन्हें इसका ब्याज भी मिलता है। इस वजह से सब्सिडी ट्रांसफर में भी देरी हो रही है। इसकी शिकायत कई बार उद्योग विभाग से भी की गई, लेकिन कभी किसी बैंक पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।

योजना में मिलते हैं दो तरह के लोन

योजना में दो तरह के लोन दिए जाते हैं। पहला सर्विस सेक्टर और दूसरा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए। अगर कोई सर्विस सेक्टर के लिए बिजनेस करना चाहते हैं तो उन्हें 15 लाख रुपए तक और मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 25 लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है। स्वयं सहायता समूह, संस्थान से जुड़े लोग, सहकारी समितियां, ट्रस्ट और व्यक्तिगत रूप से अप्लाई कर सकते हैं। विडंबना ये है कि केंद्र सरकार की इस योजना का जिले में मजाक बनकर रह गया है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम केंद्र सरकार की योजना है। इसमें बैंक कुछ नहीं कर सकती। हितग्राही यदि खुद लिखकर देता है कि एक निश्चित समय में कर्ज की राशि लौटा देगा तो सब्सिडी नहीं काटी जाती। सब्सिडी की राशि को लेकर कुछ लिखा नहीं होगा। इसीलिए उसे लेट में सब्सिडी मिली होगी। फिलहाल मैं इस पूरे मामले को देखकर ही कुछ बता पाउंगा।

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