Chhattisgarh

कभी इन नक्सलियों का लाल गलियारे में खौफ था, आज कर रहे मतदान केंद्र की सुरक्षा

माओवादी रह चुके अर्जुन और वेट्‌टी अब बस्तर पुलिस में गोपनीय सैनिक
ऑटोमैटिक हथियार लिए इन सैनिकों ने कहा- अब गर्व महसूस हो रहा
सुकमा. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा में गुरुवार को बूथ क्रमांक 210 पर सैनिक की वर्दी में ऑटोमैटिक हथियार लिए दो चेहरे ऐसे थे, जिनसे कभी इलाके के लोग डरते थे। कारण कि यह लोग हमेशा चुनाव के खिलाफ थे। नक्सल संगठन में कई पदों पर रह चुके, इन दोनों के नाम वेट्‌टी रामा और अर्जुन हैं। संगठन में रहते हुए इन्हाेंने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया।
हालांकि, अब तस्वीर बदल चुकी है। वेट्‌टी रामा और अर्जुन अब बस्तर पुलिस में गोपनीय सैनिक के पद पर हैं। इन्हें बूथ और मतदाताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे वे मुस्तैदी से निभा रहे हैं। दोनों ने कहा कि पहले की तरह आज भी हाथों में हथियार है। मगर अब लोकतंत्र और लोगों की सुरक्षा के लिए। अब खुद पर गर्व होता है।
संगठन में बचपन में शामिल हो गया था- वेट्टी
बचपन में ही नक्सली संगठन दलम में शामिल हो चुका वेट्‌टी रामा की 23 सालों तक लाल गलियारे में मजबूत दखल रही। रामा के अलावा उसकी पत्नी वेट्‌टी जोगी नक्सलियों की डॉक्टर रही। उसकी बहन वेट्‌टी कन्नी फिलहाल संगठन में सक्रिय है। वो केएएमएस इंचार्ज कोंटा एरिया कमेटी के पद पर है। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम है। वेट्‌टी ने 13 सितंबर 2018 को सरेंडर कर दिया था। वेट्‌टी पर तब 8 लाख रुपए का इनाम था।

वेट्‌टी ने कहा- अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए तैनात
वेट्‌टी रामा ने कहा कि पहले भी हथियार उठाया पर गलत सोच के साथ। आज जनता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुस्तैद हूं। अब गर्व महसूस हो रहा है। बस्तर में भटके आदिवासी जो नक्सल संगठन से जुड़े हैं, उनसे अपील करना चाहूंगा कि वे भी मुख्य धारा से जुड़ें और सम्मानजनक जिंदगी जिएं।
अर्जुन ने गुनगुनाया- अपना बस्तर सबसे प्यारा
हाल ही में 6 मार्च 2019 को सरेंडर करने वाले नक्सल कमांडर अर्जुन ने भी कहा कि कभी वह चुनाव का बहिष्कार करते थे। अब चुनाव को सुरक्षा दे रहे हैं। तब और अब में बहुत फर्क है। अब सीना ताने गर्व से खड़े हैं। लोग हमें पास पाकर खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ये बहुत बड़ी बात है। इससे बड़ी खुशी कभी नहीं मिली।
अर्जुन ने इस दौरान एक गाना भी गुनगुनाया-
हमरा बस्तर सबसे सुंदर देखो-देखो रे,
मेहनतकश दिलवाले आदिवासी रे…हम आदिवासी रे।
कोयल की कूहू-कूहू तोतो की किलकिला, बैलडिला डिला नहीं खनिजों का किला रे
अनाजो से भंडार भरा है रे भरा रे, इतना सोना बस्तर में रोना क्यों रे मरना क्यों रे।।

Leave a Reply

Your email address will not be published.