Chhattisgarh

सिलेंडर के जोर दार फटने से 50 मीटर दूर मकानों पर गिरे, धमाके से घरों में बर्तन तक हिल गए…..!!

समय दर्शन :- शादी समारोह में बैलून फुलाने वाले सिलेंडर में हुआ विस्फोट इतना ताकतवर था कि इसके चीथड़े और बड़े-छोटे टुकड़े 50 मीटर दूर तक के घरों में गिरे। धमाका की वजह से आसपास घरों के बर्तन तक खड़कने लगे। सिलेंडर का करीब पौन फीट का ऊपरी टुकड़ा तकरीबन 50 मीटर दूर संभवत: एक पेड़ से टकराया और नीचे एक घर के आंगन में तेज आवाज के साथ गिरा। गनीमत थी कि आंगन में कोई नहीं था। अगर वह पेड़ से नहीं टकराता तो कुछ और दूर गिर सकता था। यही वजह थी कि हादसे के बाद आसपास दहशत फैली और लोग घरों से निकलकर तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिलेंडर से छिटका बड़ा टुकड़ा बाबू भाई के मकान में गिरा था। यह इतना गर्म था कि काफी देर पानी डालने के बाद ठंडा हुआ। उन्होंने बताया कि करीब साढ़े 6 बजे धमाके की आवाज आई, इसके दो-तीन सेकंड बाद ही तेज आवाज के साथ आंगन में यह टुकड़ा गिरा। सिलेंडर तथा इसके आसपास की गिट्टी वगैरह भी छिटककर आसपास फैली, लेकिन इनसे कोई जख्मी नहीं हुआ। धमाके के बाद लोग पहुंचे तो घायलों की चीखपुकार मची हुई थी। इसके बाद पूरी बस्ती जुट गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

विस्फोट से क्षत-विक्षत अंगों को जोड़ा नहीं डॉक्टरों ने

सिलेंडर हादसे में बुरी तरह घायल महिलाएं-बच्चे समेत पांच लोग अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर ले जाए गए तो वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। पहली बार इलाज के लिए कई विभागों के एचओडी कुछ देर में ट्रामा सेंटर में पहुंच गए। लेकिन घायलों के पैर तथा अलग हुए हिस्से जिस तरह क्षतविक्षत थे, उस वजह से डाक्टरों ने इन्हें नहीं जोड़ने का फैसला किया। अस्पताल की ओर से सूचना मिलने से पहले ही अंबेडकर अस्पताल में ऑर्थोपीडिक विभाग के एचओडी डॉ. सत्येंद्र फुलझेले, प्लास्टिक सर्जरी के एचओडी डॉ. दक्षेस शाह और सर्जरी के प्रभारी एचओडी डॉ. संदीप चंद्राकर ट्रामा पहुंच गए थे। सीनियर डाक्टरों के साथ हुई बातचीत के बाद डॉ. शाह ने बताया कि जिन लोगों का पैर कटकर अलग हुआ है, उन्हें दोबारा जोड़ने में इसलिए परेशानी आएगी क्योंकि मांसपेशियां क्षत-विक्षत हो गई हैं। जो हिस्सा अलग हुआ, वह भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। अगर मांसपेशियां ही ठीक होतीं तो कटे हुए हिस्सों को जोड़ा जा सकता था।

 मसाले (कार्बेट) में ज्यादा पानी डालने से गैस बनी और सिलेंडर झेल नहीं पाया
सिलेंडर धमाके में घायल लोगों की हालत नाजुक है, इसलिए इस विस्फोट की वजह अब तक साफ नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है की शहरों में सजाने और उड़नेवाले बैलून फुलाने में हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल होता है। यह गैस वेल्डिंग के इस्तेमाल में आने वाले मसाले से बनाई जाती है। आमतौर से इसे कार्वेट कहा जाता है। सिलेंडर में 50 ग्राम मसाला और पानी डालकर नोजल बंद कर दिया जाता है। कुछ मिनट में गैस बन जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर जल्दी गैस बनाने के लिए सिलेंडर में ज्यादा मसाला डाल दिया जाए और गर्म पानी डालकर नोजल बंद किया जाए तो तेजी से गैस बनती है। संभवत: ऐसा ही हुआ होगा और कंडम सिलेंडर बनने वाली गैस का दबाव नहीं सह पाया।

घटनास्थल सील, फोरेंसिक एक्सपर्ट आज करेंगे जांच
पुलिस ने लोगों से पूछताछ के आधार पर बताया कि गुब्बारे वाला  युवक कुंवर सिंह है। गैस सिलेंडर उसी ने रेडी किया था और एक बैलून में गैस भी डाल दी थी। मौसम गौतम वहां बैलून को धागों में पिरोकर सजाने की तैयारी कर रहा था। पुलिस को शक है कि सिलेंडर का रेगुलेटर घुमाने या गैस का प्रेशर बढ़ने की वजह से सिलेंडर जबर्दस्त धमाके से फटा। हादसे में गुब्बारे वाले कुंवर सिंह समेत कोई घायल बयान देने की स्थिति में नहीं है। बुधवार को सुबह फोरेंसिक जांच कराने के लिए पुलिस ने घटनास्थल सील कर दिया है।

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