Chhattisgarh

दुर्ग जिले में इमर्जेंसी नंबर 15 अगस्त से शुरू

 

>> 100 की जगह 112 नंबर में डायल करने से पुलिस, एम्बुलेंस, फायरब्रिगेड की मिलेगी सुविधा

>> डायल 112 का प्रशिक्षण सत्र आज से 

भिलाई नगर। दुर्ग जिले में 15 अगस्त से 112 नंबर डायल करने पर पुलिस, एम्बुलेंस और फायरब्रिगेड की सेवा तत्काल आम जनमानस को दुर्घटना घटने पर तत्काल उपलब्ध होगी। 100 नंबर की जगह अब 112 नंबर डायल करना होगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव शुक्ला, एडीसनल एसपी विजय पाण्डेय एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात एवं क्राईम प्रभारी विजय अग्रवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में 112 नंबर को डायल करने पर अधिकतम   30 मिनट में पुलिस घटना स्थल पर पहुंच जायेगी। शहरी क्षेत्रों के लिए 10 मिनट का समय रखा गया है। दुर्ग जिले में 35 चार पहिया वाहन तथा 10 दो चक्के वाहन चौक चौराहें सहित थानों में उपलब्ध रहेगी। जिस दिशा से 112 नंबर से फोन आयेगा। उस ओर तत्काल पुलिस की गाड़ी रवाना हो जायेगी। पुलिस का कर्तव्य घटना-दुर्घटना को रोकना है। इसके लिए आज सभी पुलिस अधिकारियों का बैठक रखी गई थी। इस 112 नंबर पर भारी मशक्कत के साथ 15 अगस्त को चालू करने का इंतजाम किया गया है। गौरतलब हो कि देश भर में एकल इमर्जेंसी नंबर ‘112 एक जनवरी से शुरू होगा। इससे उन लोगों को मदद मिल सकेगी जिन्हें पुलिस, ऐंबुलेंस या अग्मिशमन विभाग की सहायता की जरूरत है। ‘एकल इमर्जेंसी नंबर ‘112 एक जनवरी से चालू हो जाएगा। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी आपात सेवाओं के लिए एकल नंबर के प्रावधान को मंजूरी दे दी है। यह अमेरिका में सभी आपात सेवाओं के एक नंबर ‘911Ó की तर्ज पर है। यह सेवा उन सिम या लैंडलाइन पर भी उपलब्ध होगी जिनकी आउटगोइंग सुविधा रोक दी गई। परेशानी में फंसा कोई भी व्यक्ति ‘112 नंबर पर कॉल करेगा तो उसकी कॉल तत्काल संबंधित विभाग को स्थानांतरित की जाएगी। 112 नंबर शुरू होने के बाद अन्य सभी मौजूदा आपात नंबर धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। यह इस नई सुविधा को लेकर जागरूकता पर निर्भर करेगा। फिलहाल देश में पुलिस के लिए 100 नंबर डायल करना होता है। फायरब्रिगेड के लिए 101, ऐंबुलेंस के लिए 102 तथा आपात आपदा प्रबंधन के लिए 108 नंबर डायल करना होता है। अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार ऑपरेटरों को सभी इमर्जेंसी कॉल्स को 112 नंबर पर स्थानांतरित करने को कहा गया है। कोई व्यक्ति स्रूस् के जरिये भी अपनी बात पहुंचा सकता है। यह प्रणाली कॉलर के गंतव्य का पता लगा लेगी और उसे नजदीकी सहायता केंद्र से साझा करेगी। लोग इस 112 नंबर को पैनिक बटन प्रणाली में फीड कर सकेंगे।
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(खिलावन सिंह चौहान)

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