Chhattisgarh

छत्तीसगढ़: किसान ने कर्ज और नोटिस से परेशान होकर की आत्महत्या; फसल नुकसान पर मिला 13 हजार का चेक भी नहीं हो पा रहा था कैश

बिलासपुर। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में कर्ज से दबे एक किसान ने गुरुवार रात आत्महत्या कर ली। किसान चार साल से कम बारिश होने के कारण सूखे की मार झेल रहा था। उस पर लिया गया कर्ज भी बढ़ता जा रहा था। इस पर किसान अपने ससुराल पहुंचा और उसने जान दे दी।

जानकारी के मुताबिक किसान की आत्महत्या का मामला बिलासपुर जिले के पेंड्रा विकासखंड के कुदरी गांव है। जहां मरवाही के पिपरिया गांव में रहने वाला सुरेश सिंह मरावी ने अपने ससुराल में आकर आत्महत्या कर ली। चार बेटियों का पिता यह किसान 12 एकड़ खेती खेतिहर जमीन का मालिक था।बताया जा रहा है कि सुरेश चार सालों से लगातार कम हो रही बारिश के कारण परेशान था। इसके चलते उसके खेत सूखे की चपेट में थे। सुरेश ने किसान सेवा सहकारी समिति लरकेनी समिति से 1.20 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जो 4 साल में बढ़कर करीब 1.70 लाख हो गया था। इस बार के कम बारिश के कारण वो अपने खेत में एक दाना भी फसल उगा पाया।इसके बाद सेवा सहकारी समिति लरकेनी ने कर्ज चुकाने के लिए सुरेश को लगातार नोटिस भेज रहे थे। इसके कारण वो मानसिक तनाव में चला गया। वहीं लोगों ने बताया कि परिवार पालने के लिए स्थानीय स्तर पर कुछ छोटे-मोटे कर्ज उसने लिए थे। इन सबसे परेशान होकर सुरेश गुरुवार शाम अपने ससुराल कुदरी आ गया। यहां पर उसने अपने बच्चों को कमरे में सुला दिया और फिर दूसरे कमरे में जाकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद से ही परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल है। परिजनों का आरोप है कि सुरेश लगातार कर्ज के बोझ से परेशान था और वही उसके मौत का कारण है। उधर, पुलिस का कहना है कि वहीं सुरेश सिंह करीब 3 माह पहले भी एक बार अपने घर पिपरिया में आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। जिसकी जांच अभी चल ही रही थी, की ससुराल में आकर सुरेश ने अपनी जान दे दी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

मुआवजे का चेक भी नहीं हुआ कैश

बताया जा रहा है कि इस बार के फसल नुकसान का सूखा राहत राशि का 13 हजार रुपये का मुआवजा शासन ने चेक के माध्यम से सुरेश को दिया था। इसे सुरेश ने बैंक में जमा कर दिया, लेकिन बैंक की लेटलतीफी के कारण 15 दिन बीत जाने के बाद भी रुपये उसके खाते में नहीं आए।

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