Chhattisgarh

जेल में मूलभूत सुविधाओं बिना तरसती रहीं हड़ताल में गयी नर्सें

रायपुर।अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहीं नर्सों को पुलिस ने प्रशासन के आदेश के बाद शुक्रवार को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन जेल में भी उनको बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। राजधानी रायपुर में बदले मौसम के बाद हो रही बारिश में सारी रात नर्सें भीगती रहीं। पानी से बचने के लिए वो इधर- उधर छिपने की कोशिश करती रहीं, लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ। सुबह भी ऐसे ही हालात बने हुए हैं।

एस्मा लगने के बाद पुलिस ने नर्सों को गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिया है। यहां के महिला सेल में नर्सों की संख्या के मुताबिक उनके रहने की जगह नहीं है। इसकाे लेकर शुक्रवार रात से ही हंगामा चल रहा है। प्रशासन ने इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ नर्सों को छोड़ने का भी प्रयास किया, पर वो अपने साथियों को नहीं छोड़कर जाने के लिए अड़ी रहीं।जेल में बुनियादी सुविधाओं से वंचित नर्सों ने देर रात भी हंगामा किया था। वहीं उनके परिजन भी बाहर हंगामा करते रहे। इसमें नर्सों के बच्चे भी शामिल थे। परिजनों का आरोप था कि जेल में नर्सों को मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही है। दोपहर से उन्हें जेल में रखा गया है। उन्हें अब तक खाना नहीं दिया गया है। सुबह से ही नर्सें भूखी हैं। इस वजह से कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई है। नर्सों के विरोध के बाद पुलिस ने पानी की व्यवस्था की है। निगम से टैंकर मंगाया गया है, लेकिन वह पानी भी पीने लायक नहीं था। गर्मी की वजह से टैंकर का पानी पूरी तरह से तप रहा था। 656 नर्सों को दोपहर से ही बाहर रखा गया है। उनके लिए छांव की भी व्यवस्था नहीं की गई। रात में भी आंधी-तूफान शुरू हो गई। फिर भी नर्सें खुले में थी। रात 10 बजे नर्सों के प्रसाधन के लिए अस्थाई टायलेट निगम से मंगाया गया।

वीडियो की बात फैली तो पुलिस को दखल देना पड़ा
जेल परिसर में नर्सों का वीडियो बनाकर वायरल करने का हल्ला मचने के बाद खासा हंगामा मच गया। नर्सें और उनके परिजन वॉच टॉवर में तैनात जवानों पर वीडियो बनाकर वायरल करने का आरोप लगाने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। नर्सों और उनके परिजनों की आेर से लिखित शिकायत दी गई। पुलिस अफसरों ने जांच का आश्वासन दिया। उसके बाद स्थिति संभली। कई नर्सों के बच्चे उनसे मिलने के लिए जेल आए थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। बच्चे मां से मिलने के लिए रो रहे थे। पुलिस वाले भी नर्सों के परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस के सौ से ज्यादा जवान सुबह से ही जेल परिसर में तैनात किए गए थे।

अंबेडकर अस्पताल में नहीं सुधरी व्यवस्था

नर्सों की हड़ताल के कारण अंबेडकर अस्पताल में मरीजों को इंजेक्शन लगवाने व दवा के लिए परेशान होना पड़ रहा है। नर्स संघ का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद भी हड़ताल जारी रहेगी। नर्सों की गिरफ्तारी के विरोध में आईएमए से जुड़े डॉक्टर शनिवार को काली पट्टी लगाकर काम करेंगे।  प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि पखवाड़े भर से अधिक समय से नर्सें अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। नर्सों की हड़ताल की वजह से स्वास्थ्य सेवायें भी बुरी तरह प्रभावित है।सरकार को न तो मरीजों की फिक्र है और न ही नर्सों की। आईएमए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक त्रिपाठी ने कहा कि नर्सों की गिरफ्तारी उचित नहीं है। फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी गुर्देकर ने गिरफ्तारी को दमनात्मक कार्रवाई बताया है।

मरीजों के हित में लगाया गया हड़ताली नर्सों के खिलाफ एस्मा

नर्सों की स्ट्राइक 18 मई को शुरू हुई, आज 1 जून है, अंबेडकर में नर्सिंग सेवाओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। जिस वेतनमान की ये मांग कर रही हैं वह मध्य प्रदेश में भी नहीं दिया जा रहा है। मैंने अपनी ज्वाइनिंग के दो दिन के अंदर सभी को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक विवेक चौधरी की मौजूदगी में अन्य राज्यों की स्थिति का आंकलन करने के लिए समिति के गठन पर सहमति बनी थी। उस समय इन्होंने कहा था कि समिति के गठन के बाद वे हड़ताल वापस ले लेंगी।मैंने अगले दिन ही स्वास्थ्य मंत्री से इसके लिए अनुमोदन ले लिया था। पांच राज्योें में वेतन स्केल के स्टडी के लिए समिति बनाए जाने के बावजूद उन्होंने हड़ताल वापस नहीं ली है इसलिए उन पर एस्मा लगाया गया और गिरफ्तार किया गया है। अनुशासन सरकार के लिए आवश्यक है और मरीजों के हित में जो भी कदम उठाना होगा सरकार उठाएगी। -ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़।

सुबह हुई थी नर्सों की गिरफ्तारी

विभिन्न मांगों को लेकर रायपुर के धरना स्थल पर हड़ताल पर बैठी नर्सों को पुलिस ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर जेल ले गई थी। यहां पर भी नर्सों ने महिला जेल के बाहर प्रदर्शन किया। इससे पहले जेल परिसर में नर्सों के नाम और पते नोट किए गए। पुलिस ने शुक्रवार सुबह नर्सों को धरना स्थल पर पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की टीम नर्सों को गिरफ्तार करने के लिए सुबह करीब 6 बजे ही पहुंच गई थी। उस दौरान पुलिस एक बस लेकर पहुंची थी। सुबह 10 बजे से नर्सों की गिरफ्तारी शुरू की गई। इसके बाद नर्सों की तादात बढ़नी शुरू हो गई। फिर पुलिस को तीन बसें और बुलानी पड़ी। सभी बसों में नर्सों को भरकर ले जाया गया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद अभी और वाहन पुलिस ने मंगाए गए।

28 मई की रात लगाई गई थी एस्मा

राज्य सरकार की ओर से 28 मई की रात हड़ताली नर्सों पर एस्मा लगा दिया गया था। इसके बाद सभी नर्सों को काम पर लौटने के लिए कहा गया। इसमें से कुछ नर्सेंं तो काम पर चली गईं, लेकिन ज्यादातर ने हटने से मना कर दिया। इसके बाद सीएमएचओ की ओर से गुरूवार को नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। आजाद नगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में पांच नर्सें नामजद और अन्य के खिलाफ थी। एस्मा लागू होने के बाद से ना सिर्फ धरना स्थल पर बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है बल्कि उन्हें हटाने के लिए यहां भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया। पुलिस ने धरना स्थल पर एस्मा आदेश की कॉपी भी चस्पा कर दी थी। बता दें कि नर्सों को धरना स्थल से हटाने पहुंचे प्रशासनिक अमले ने नर्सों के एक प्रतिनिधि मंडल को स्वास्थ्य सचिव रानू साहू से बात करने भेजा था। बातचीत सार्थक नहीं होने पर पुलिस इन आंदोलनकारी नर्सों को गिरफ्तार होने की संभावना बन रही थी।

सैलरी बढ़ाए जाने की मांग पर आंदोलन

सैलरी बढ़ाए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की तीन हजार नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिसके कारण प्रदेश के अस्पतालों के हालात बिगड़ी हुई है। यहां तक की मरीजों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इसी के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है।

एस्मा यानी आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पूर्व इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्‍य माध्यम से सूचित किया जाता है। एस्मा का नियम अधिकतम 6 माह के लिए लगाया जा सकता है।इस अधिनियम के लागू होने के उपरान्त यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध‍ एवं दंडनीय है। क्रिमिनल प्रोसीजर 1898 (5 ऑफ 1898) के अन्तर्गत एस्मा लागू होने के उपरान्त इस आदेश से सम्बन्धी किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।

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