Chhattisgarh

जिस गांव में पत्थर तोड़ने के बाद गिरफ्तारियां हुईं वहां फिर बगावती तेवर, खड़ा किया नया पत्थर

बिलासपुर. पत्थलगड़ी अभियान को रोकने के लिए प्रशासन ने गिरफ्तारियां तेज कर दी है। वहीं ग्रामीण नए सिरे से लामबंद होने लगे हैं। बुटंगा गांव के जिस पत्थर को तोड़कर नारे मिटाए गए थे वहां पर नया पत्थर लगा दिया गया है। जशपुर जिले के आदिवासी गांव बुटंगा के साथ ही कलिया और आसपास के गांव भीतर ही भीतर सुलग रहे हैं। बुटंगा में पत्थलगड़ी टूटने के बाद माहौल और गरमा गया है। पत्थलगड़ी के बहाने बड़ा विद्रोह खड़ा करने की बात नए सिरे से सामने आ रही है।

भास्कर की टीम पहुंची तो समझाइश के बाद बात को हुए राजी

पत्थलगड़ी टूटने के तीसरे दिन भास्कर टीम जब यहां पहुंची तो काफी समझाइश के बाद लोग बात करने के लिए राजी हुए। एस कुजूर की नातिन रूपा कुजूर की पिछले वर्ष 8 सितंबर को शव मिला था। कुजूर को सूचना मिली कि उनकी नातिन ने आत्महत्या कर ली है, लेकिन बाद में बच्छरांव के ही सुमेर यादव को पुलिस ने पकड़ा। कुछ माह बाद वह जमानत पर छूट गया। ग्रामीण अब इस मामले की फाइल खोलने की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि अगर हम नहीं जागीं, तो हमारे साथ इसी तरह अन्याय होता रहेगा। उधर, बच्छरांव और सिहारडांड में भी हालात ठीक नहीं। आदिवासी सरकार के प्रति गुस्सा होना तो स्वीकार करते हैं, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलते। पत्थर तोड़ने के बाद इस इलाके से हुई 8 लोगों की गिरफ्तारी से गांव में लोगों ने चुप्पी साध ली है। गांव की गलियों में लोग झुंड बनाकर इकट्ठे बैठे दिखे। गांव में पत्थलगड़ी पर अपना संविधान लिख उद्घाटन और रैली कराने वाले इक्का-दुक्का लोग ही आ जा रहे थे। कई लोगों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई कुछ बोलने तैयार ही नहीं हुआ।

लोगों का है कहना

किराना दुकान चलाने वाली ज्योति खेस के अनुसार ग्रामीण सरकार का विरोध नहीं कर रहे। उन्होंने तो अपनी परंपरा के अनुरूप पत्थर गाड़े। वैसे तो पत्थर पहले से गड़ा था, लेकिन उसमें अधिकारों की जानकारी नहीं थी। इसलिए नया पत्थर गाड़ दिया था। तीन लोगों को गिरफ्तार किए जाने के सवाल पर ज्योति ने कहा कि यहां ग्राम सभा में कोई मुखिया नहीं है। एक व्यवस्था के तहत किसी को मुखिया बना दिया जाता है। ज्योति का इशारा समझा जा सकता है कि अगर कथित तौर पर मुखिया पुलिस की गिरफ्त में है तो भी उनका विरोध जारी रहेगा। गांव में मिली अन्य महिलाओं ने कहा कि उन्होंने किसी को भी बंधक नहीं बनाया था, यह अफवाह है। हम लोग अधिकारियों को रोककर यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि आखिर उनके पत्थर को क्यों तोड़ा गया।

पत्थलगड़ी बनाने के लिए हुआ चंदा
बटुंगा में पत्थलगड़ी बनाने के लिए एक बार फिर चंदा हो गया है। पत्थलगड़ी ढहने से आक्रोशित आदिवासी फिर से वहां पत्थलगड़ी खड़ी करने मन बना चुके हैं। इसके लिए उन्होंने आपस में चंदा किया है। पत्थलगड़ी टूटने से उसके भीतर लगा सरिया मुड़कर नीचे बैठ गया था जिसे ग्रामीणों ने फिर खड़ा कर दिया है।

मेरे बेटे को पुलिस नहीं छोड़ा
सिहारडांड के बंधना के बेटे सुधीर को एक दिन पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने भास्कर टीम को बताया की उस गांव से चार लोगों को थाने बुलाया गया और दो लोगों को छोड़ दिया गया और उसके बेटे सुधीर और एक अन्य ग्रामीण जगदेव जगत को अभी भी हिरासत में रखा है। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने क्या गलती की है, तब उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता।

एक किताब में लिखी बातें ही सबकुछ

– गांव में एक बुजुर्ग मिले उन्होंने अपना नाम ए कुजूर बताया। उनका कहना है कि लोग अपने अधिकार की बात कर रहे हैं। इसमें कुछ अलग बात तो नहीं। जब भास्कर ने उनसे पूछा- यह कैसे पता चला संविधान में उनके लिए क्या है। कुजूर अपने घर से संविधान पर लिखी एक किताब लेकर आए जिस पर लेखक का नाम ‘बीके मनीष’ लिखा था। किताब का नाम है ‘संविधान सबके लिए’। किताब के पेज नंबर 113 को दिखाते हुए कुजूर ने कहा कि वह पत्थर पर इसी बात को लिखना चाहते थे, लेकिन उससे पहले ही पत्थर तोड़ दिया गया।

– भास्कर ने जब किताब के लेखक बीके मनीष के बारे में पतासाजी की तो मालूम हुआ कि वे एक सोशल एिक्टविस्ट हैं जो आदिवासियों के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। उनकी छवि नक्सल समर्थक की तरह है। भास्कर टीम कलिया और सिहारडांड गई, लेकिन वहां कोई बोलने तैयार नहीं हुआ। 26 अप्रैल को आदिवासियों ने पत्थलगड़ी के सामने खड़े होकर जोर-जोर से नारे लगाए थे। हालांकि पत्थर पर हरे रंग का पेंट चढ़ाया जा चुका है, लेकिन पड़ोसी गांव बुटंगा में पत्थलगड़ी को तोड़ने के बाद उस पर कुछ लिखा नहीं गया है।

जेल में पूर्व आईएएस किंडो से आईएएस बहन को मिलवाने वाले जेलर सस्पेंड

जशपुर जेल के प्रभारी उप अधीक्षक रमाशंकर सिंह को जेल डीजी गिरधारी नायक ने सस्पेंड कर दिया है। इसी जेल के एक सिपाही पर भी कार्रवाई की गई है। जेलर रमाशंकर पर आरोप है कि छुट्टी के दिन जेल नियमों को ताक में रखकर उन्होंने आईएएस जेनेलिसा किंडो की मुलाकात उनके भाई रिटायर्ड आईएएस एचपी किंडो से करवाई थी। रिटायर्ड आईएएस पत्थलगढ़ी मामले में सोमवार को गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। अफसरों ने बताया कि इस मुलाकात को छिपाने के लिए जेलर ने जेल गेट और उनके कक्ष में लगे सारे कैमरे बंद करवा दिए। यह बात जैसे ही सामने आई, आनन-फानन में कार्रवाई कर दी गई। जेल डीजी नायक ने सरकार को पत्र लिखकर आईएएस और जशपुर के एसडीएम के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है।

आईएएस जेनेलिसा किंडो निर्वाचन विभाग में सेक्रेटरी हैं। उनकी मुलाकात करवाने में जशपुर के एसडीएम ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ने ही जेल में फोन किया था कि एचपी किंडो से मिलने उनकी आईएएस बहन आ रही हैं। जांच में पता चला कि एसडीएम साथ में जेल गए थे। यह सूचना जेल डीजी गिरिधारी नायक और डीआईजी डॉ केके गुप्ता को उसी दिन मिल गई थी। डीजी ने अगले ही दिन जांच के आदेश दिए और अंबिकापुर के जेल अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़ को भेजा गया।

जेल अधीक्षक ने जेल के स्टाफ के साथ-साथ वहां बंद एचपी किंडो का बयान भी लिया। जांच में खुलासा हुआ कि मुलाकात के लिए कैमरे बंद किए गए थे, ताकि सबूत न रहे। यही वजह थी कि जब जांच अफसर ने सीसीटीवी कैमरे के फुटेज जांचे तो जेल गेट और जेलर कक्ष, कहीं भी किंडो भाई-बहन के फुटेज नहीं मिले। इसके बावजूद बयान में सच सामने आ गया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई।

मुलाकात शाम साढ़े 6 बजे

गौरतलब एचपी किंडो की बहन शाम करीब साढ़े छह बजे के बाद पहुंची थी। जेल नियमों के अनुसार छुट्टी के दिन और गेट बंद होने के बाद बेहद इमरजेंसी परिस्थितियों को छोड़कर कोई भी बंदियों या कैदियों से मुलाकात नहीं कर सकता। इसी वजह से ये कार्रवाई की गई है।

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