Chhattisgarh

बेरोजगारों की संख्या में बिलासपुर जिला प्रदेश में तीसरे नंबर पर

केंद्र व राज्य शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में एक बार फिर जिले की पोल खुल गई है। प्रदेश में बेरोजगारों की बढ़ती संख्या में हमारे जिले का नंबर तीसरा है। कौशल उन्न्यन योजना और स्टार्टअप को लेकर केंद्र सरकार ने मुहिम चलाई थी।

योजनाओं को लागू किए एक वर्ष से अधिक का समय हो गया है। बेरोजगारों ने दोनों ही महत्वाकांक्षी योजनाओं को नकार दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा बीते चार वर्षों से कौशल उन्न्यन योजना चलाई जा रही है। प्रदेश में बिलासपुर जिला को मॉडल बनाया गया था।

बिल्हा ब्लॉक के ग्राम निपनिया में प्रदेश का पहला लाइवलीहुड कॉलेज (आजीविका कॉलेज) की शुस्र्आत की गई थी। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया था। तीन वर्ष बाद केंद्र सरकार ने इसे देशभर में लागू करने की योजना बनाई और कौशल उन्न्यन योजना के क्रियान्वयन को लेकर मंत्रिमंडल में एक पद ही बना दिया।

तब प्रदेश के दिग्गज भाजपाइयों ने राज्य शासन की योजना को देशभर लागू करने की बात कहते हुए अपनी पीठ भी थपथपाई थी । छत्तीसगढ़ को इसके लिए रोल मॉडल भी बताया था । कौशल उन्न्यन योजना के क्रियान्वयन के साथ ही श्रम विभाग में इसके लिए नई-नई योजनाएं भी चलाई जा रही है।

निपनिया के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। केंद्र व राज्य शासन द्वारा चलाई जा रही योजना का मैदानी स्तर पर प्रभावी असर नजर नहीं आ रहा है। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सभी 27 जिलों में बेरोजगारों की संख्या को लेकर जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति भयावह नजर आने लगी है।

सरकार के तमाम दावों के बावजूद शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते एक वर्ष के दौरान बेरोजगारों की संख्या में तकरीबन 4 लाख 26 हजार 610 की बढ़ोतरी हो गई है। वर्ष 2016-17 में 19 लाख 53 हजार 556 बेरोजगारों का नाम पंजीकृत किया गया था। वर्ष 2017-18 में 23 लाख 80 हजारी 161 हो गए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में दुर्ग एक नंबर पर है।

राजनादगांव का नंबर दूसरे क्रम पर है। तीसरे स्थान पर बिलासपुर जिला है। दुर्ग में तीन लाख 9 हजार 529,राजनादगांव में एक लाख 90 हजार 307 व बिलासपुर में एक लाख 84 हजार 640 है।

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