Chhattisgarh

झीरम घाटी हमला: आयोग में अर्जी- शिंदे, रमन और कंवर को गवाह के तौर पर बुलाएं

झीरम घाटी की नक्सली हिंसा के पांच साल बाद कांग्रेस ने इस मामले में एक नया राजनीतिक दांव खेला है। घटना की न्यायिक जांच कर रहे न्यायिक जांच आयोग में कांग्रेस ने एक आवेदन देकर उस समय केंद्रीय गृहमंत्री रहे कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे, तत्कालीन गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, तत्कालीन गृहमंत्री ननकीराम कंवर को शपथ पत्र के साथ गवाह के रुप में बुलाने की मांग की है। आयोग ने राज्य शासन को जवाब देने के लिए एक दिन का समय दिया है। साथ ही इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

4 साल से मामले में केवल हो रही राजनीति

25 मई 2013 को झीरम घाटी की नक्सली हिंसा में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और विद्याचरण शुक्ल समेत 30 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय तो कांग्रेस ने केवल इसे साजिश बताकर जांच के लिए दबाव बनाया था। बाद में इस मामले में लगातार राजनीति होती रही। हाल में नंदकुमार पटेल की जयंती के अवसर पर उनके गांव नंदेली में एलान किया कि पार्टी झीरम घाटी की जांच को घोषणा पत्र में पहले नंबर पर रखेगी। उसके बाद आज यह नया दांव सामने आया। गवाह के रुप में केंद्र और राज्य के तत्कालीन जिम्मेदार लोगों को गवाह के रुप में प्रतिपरीक्षण के लिए बुलाने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि मामले के मुख्य याचिकाकर्ता विवेक वाजपेयी हैं। न्यायिक आयोग के समक्ष अब तक 41 स्वतंत्र व्यक्तियों और 21 पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों का प्रतिपरीक्षण हो चुका है।

नानावटी अौर लिब्रहान आयोग द्वारा बुलाए जाने का हवाला

कांग्रेस की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने दिए अावेदन में 1984 में सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए गठित किए गए नानावटी आयोग में तत्कालीन गृह मंत्री स्व. पीवी नरसिम्हा राव को बयान के लिए बुलाने का हवाला दिया है। इसी तरह बाबरी मस्जिद ढहाने की घटना की जांच के लिए बनाए गए लिब्रहान आयोग में तत्कालीन गृहमंत्री स्व. एसबी चव्हाण, तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. पीवी नरसिम्हा राव, यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बयान देने की जानकारी का भी उल्लेख है।

एनआईए के बाद सीबीआई ने नहीं की जांच

घटना के तुरंत बाद राज्य सरकार ने एनआईए से जांच करवाई। एनआई ने तीन साल जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दे दी है। उसके बाद सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, पर सीबीआई ने जांच से मना कर दिया ।

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