Chhattisgarh

विश्व टीबी दिवस के लिए प्रचार रथ रवाना, मास्क वितरण कर लोगों को करेंगे जागरुक

दुर्ग / जिले में इस साल 24 मार्च के दिन यानी विश्व टीबी दिवस के मौके पर लोगों को मास्क का वितरण किया जाएगा। बुधवार को सुबह 8.30 बजे टीबी अस्पताल से मास्क वितरण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। शहर के जनसामान्य लोगों को ट्रैफिक पुलिस, बस, ऑटो सर्विस, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व अन्य सहयोगियों को कोरोना व टीबी से बचाव के लिए मास्क का वितरण किया जा रहा है। टीबी दिवस पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आज जिला अस्पताल परिसर से जागरुकता रथ को जिला टीबी अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शुक्ला द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना कियागया। बुधवार को सभी उपस्वास्थ्य केन्द्रोंके हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर्समें पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को टीबी के संबंध में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है।

डॉ. शुक्ला ने बताया, “टीबी यानी टयूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक करना है। इस वर्ष विश्व क्षय रोग दिवस 24 मार्च 2021 को एक खास थीम “The Clock is Ticking”(घड़ी चल रही है) पर आधारित है। जो यह समझाता है कि वैश्विक नेताओं द्वारा टीबी को समाप्त करने की प्रतिबद्वताओं पर कार्य करने के लिए दुनिया समय से बाहर चल रही है। हर साल विश्व में कितने ही लोग क्षयरोग यानि टीबी की बीमारी की वजह से मर जाते हैं। यह बीमारी महामारी का रुप धारण ना कर ले, इसके फलस्वरुप क्षयरोग के प्रति लोगों को जागरुक करने, महामारी उन्मूलन के प्रयासों को बढ़ाने, स्वास्थ्य, और तपेदिक (टीबी) के सामाजिक एवं आर्थिक परिणाम के बारे में जागरूक करने हेतु विश्व टीबी दिवस को हर वर्ष मनाया जाता है।

जिले में सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए “ टीबी हारेगा – देश जीतेगा ” अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले के हाई रिस्क एरिया में टीबी के एक्टिव केस खोजे गए। टीबी खोज अभियान के तहत मार्च 2021 में 2.33 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग में 2,383 संभावितों की जांच में 53 नए मरीज खोजे गए थे। टी.बी. को प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका जाना आवश्यक अन्यथा इससे व्यक्ति की स्थिति गंभीर भी हो जाती है। किसी भी व्यक्ति में इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है लेकिन बाद में यह रोग गंभीर रूप ले लेता है। टी.बी. रोग को अन्य कई नाम से भी जाना जाता है, जैसे तपेदिक, क्षय रोग तथा यक्ष्मा। छत्तीसगढ राज्य को वर्ष 2023 तक टीबी मुक्त और वर्ष 2025 तक भारत से इसका नामोनिशान मिटा देने के लिए सभी को लड़ना होगा”।

देश में हर तीन मिनट में दो मरीज क्षयरोग के कारण दम तोड़ देते हैं। हर दिन चालीस हजार लोगों को इसका संक्रमण हो जाता है। टी.बी. रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसे फेफड़ों का रोग माना जाता है, लेकिन यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है, जैसे हड्डियाँ, हड्डियों के जोड़, लिम्फ ग्रंथियाँ, आँत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली आदि।

टी.बी. के बैक्टीरिया साँस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। किसी रोगी के खाँसने, बात करने, छींकने या थूकने के समय बलगम व थूक की बहुत ही छोटी-छोटी बूँदें हवा में फैल जाती हैं, जिनमें उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में साँस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं। रोग से प्रभावित अंगों में छोटी-छोटी गाँठ अर्थात् टयुबरकल्स बन जाते हैं। उपचार न होने पर धीरे-धीरे प्रभावित अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और यही मृत्यु का कारण हो सकता है। टी.बी. का रोग गाय में भी पाया जाता है। दूध में इसके जीवाणु निकलते हैं और बिना उबाले दूध को पीने वाले व्यक्ति रोगग्रस्त हो सकते हैं।

क्षयरोग (टीबी) के लक्षण-

लगातार 3 हफ्तों से खांसी का आना
खांसी करने पर बलगम में थूक का आना
छाती में दर्द और सांस का फूलना
अचानक से वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना
शाम को बुखार का आना और ठंड लगना
रात में पसीना आना
भूख में कमी आना।
बहुत ज्यादा फेफड़ों का इंफेक्शन होना।
सांस लेने में तकलीफ।

क्षयरोग (टीबी) से बचाव-

टीबी के मरीज से कम-से-कम एक मीटर की दूरी बनाकर रहें।
टीबी के मरीज को मास्क पहनाने पर जोर दें।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर नहीं जाएं।
टीबी के मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंदकर डस्टबिन में डाल दें।
टीबी के मरीज का कमरा अलग हो।
टीबी के मरीज के द्वारा प्रयोग की जाने वाली सारी चीजें अलग होनी चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को टीबी के मरीज से दूर रखना चाहिए क्योंकि इनमें बैक्टीरिया फैलने की संभावना अधिक होती है।
दो हफ्तों से अधिक समय तक खांसी रहती है, तो लापरवाही न बरतें बल्कि समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर आपको पता है कि किसी व्यक्ति को टीबी है तो जितना हो सके उससे दूरी बना कर रखें। क्योंकि ये एक तरह का संक्रमित रोग है।
अगर आपके आस-पास कोई बहुत देर तक खांस रहा है, तो उससे सावधान होकर तुरंत अलग हट जाएं।
अगर आप किसी टीबी के मरीज मिलने जा रहे हैं, तो वापिस घर आकर अच्छी तरह हाथ—मुंह धोकर कुल्ला कर लें।
इस रोग से बचाव के लिए पौष्टिक आहार लें। ऐसे आहार जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स, मिनेरल्स, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर लेना चाहिए।

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