Business

अमेरिका / ट्रम्प ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए, लोहा-स्टील समेत 4 धातुओं का निर्यात नहीं कर सकेगा

  • लोहा, स्टील, एल्युमीनियम और तांबा ईरान के कुल निर्यात का 10% हिस्सा
  • ट्रम्प ने कहा- प्रतिबंधों का मकसद ईरान को धातुओं के निर्यात से होने वाले राजस्व में कटौती करना
  • ‘दूसरे देशों से भी यही कहना चाहते हैं कि ईरान से आने वाली धातुओं को अपने बंदरगाहों पर न उतरने दें’

वॉशिंगटन. अमेरिका ने ईरान पर बुधवार को नए प्रतिबंध लगाए हैं। ये प्रतिबंध लोहा, स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के निर्यात पर लगाए गए हैं। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ईरान के कुल निर्यात का 10% इन्हीं धातुओं के निर्यात से मिलता है। अमेरिका के नए प्रतिबंधों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

ट्रम्प ने कहा, ‘‘मैंने ईरान के लोहा, स्टील, एल्युमीनियम और तांबा सेक्टर पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं। ईरान के निर्यात राजस्व का सबसे बड़ा गैर-पेट्रोलियम स्रोत यही है। प्रतिबंधों का मकसद ईरान को धातुओं के निर्यात से होने वाले राजस्व में कटौती करना है। हम दूसरे देशों से भी यही कहना चाहते हैं कि ईरान से आने वाले स्टील और अन्य धातुओं को अपने बंदरगाहों पर न उतरने दें।’’

गलत जगह इस्तेमाल कर सकता है रकम

ट्रम्प ने ईरानी अधिकारियों से मिलने की भी इच्छा जताई है। साथ ही आदेश में यह भी कहा कि ईरान धातुओं के निर्यात से मिलने वाली रकम को बड़े पैमाने पर हथियारों की खरीद, आतंकी गुटों और उनके नेटवर्क को मदद देने और सैन्य विस्तार में इस्तेमाल कर सकता है। ट्रम्प के मुताबिक- अमेरिका इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि ईरान किसी भी रूप से परमाणु हथियार और अंतरमहाद्वीपीय (इंटरकॉन्टिनेंटल) बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे न बढ़ा सके।

ईरान का एटमी डील की कुछ शर्तों को मानने से इनकार 

ईरान ने बुधवार को 2015 की एटमी डील की कुछ शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद ही अमेरिका ने उस पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। ईरान, रूस, चीन, फ्रांस, यूके और जर्मनी समझौते में शामिल हैं। 2018 में अमेरिका ने खुद को इस समझौते से अलग कर लिया था।

ईरान से तेल खरीदने वाले देशों को प्रतिबंधों में छूट नहीं

अप्रैल में अमेरिकी सरकार ने फैसला लिया कि ईरान से तेल आयात करने वाले देशों को अब प्रतिबंधों से कोई छूट नहीं दी जाएगी। मई में भारत समेत 8 देशों को प्रतिबंधों में मिली छूट की मियाद खत्म हो रही है। व्हाइट हाउस की सचिव सारा सैंडर्स के मुताबिक, इसके फैसले का मकसद ईरान का तेल आयात शून्य करना है। सैंडर्स ने कहा कि दुनिया के सबसे ज्यादा ऊर्जा उत्पादक देश अमेरिका, सऊदी अरब और यूएई अपने साथियों के साथ इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि वैश्विक तेल बाजार में पर्याप्त मात्रा में सप्लाई होती रहे। उधर, सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार इस फैसले का अध्ययन कर रही है और सही वक्त आने पर इस पर कुछ कहेगी।

दोनों देशों के बीच बढ़ सकता है तनाव
दो दिन पहले ही अमेरिका ने मध्यपूर्व में अपना नौसैना आक्रमण दल तैनात करने का फैसला किया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने कहा कि इसका मकसद ईरान को साफ संदेश देना है कि अगर उन्होंने अमेरिका या उसके मित्र देशों के हितों का नुकसान किया तो उसे हमारी बेरहम ताकत का सामना करना पड़ेगा। बोल्टन ने कहा, “हम ईरान से युद्ध नहीं करना चाहते, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। फिर चाहे वह किसी छद्म तरीके से हो या ईरान की सेनाओं की तरफ से।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *