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भारतवंशी निशा ने पेशा बदलकर मोगली नाम का रेस्टोरेंट खोला, 5 साल में इस चेन के 7 रेस्टोरेंट

निशा को खाना बनाना और खिलाना पसंद, कुकिंग पर तीन किताबें भी लिख चुकीं
महिला होने के कारण काफी मुश्किलें आई, दोस्तों ने भी किया था विरोध
20 साल तक वकालत की, लिवरपूल में एशियाई मूल की पहली महिला वकील बनी थीं

लंदन. निशा काटोना ब्रिटेन के लिवरपूल में वकालत करने वाली एशियाई मूल की पहली महिला वकील बनी थीं। वे पारिवारिक और बच्चों से जुड़े मामलों की वकील थीं। करीब 20 साल का वकालत का उनका करिअर काफी सफल भी था। लेकिन 2014 में उन्होंने अचानक यह पेशा छोड़ने का फैसला कर लिया। निशा ने वह काम करने का फैसला किया जिसका शौक उन्हें बचपन से था। वह काम था खाना बनाना और लोगों को खिलाना।

बेटियों को मोगली कहती थीं, रेस्टोरेंट का भी वही नाम रखा

परिवार और दोस्तों की सलाह के विपरीत जाते हुए निशा ने रेस्टोरेंट खोलने का फैसला किया। इसका नाम उन्होंने मोगली रखा। मोगली नाम जंगलबुक के पात्र से प्रभावित नहीं है। निशा अपनी बेटियों को मोगली पुकारती थीं। इसलिए उन्होंने रेस्टोरेंट का नाम भी मोगली रखा। तमाम आशंकाओं को गलत साबित करते हुए निशा ने न सिर्फ इस रेस्टोरेंट को सफल बनाया, बल्कि आज की तारीख में वे ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों में मोगली चेन के सात रेस्टोरेंट की मालिक हैं।

भारतीय खाने के प्रति बचपन से रहा रुझान

मोगली रेस्टोरेंट पारंपरिक भारतीय खाने के लिए लोकप्रिय है। निशा बताती हैं कि उनके पिता 1960 के दशक में भारत से ब्रिटेन आए थे। उनके परिवार ने समय के साथ खुद को ब्रिटिश माहौल में पूरी तरह ढाल लिया लेकिन ब्रिटिश खाना भारतीय खाने की जगह नहीं ले पाया। इस वजह से भारतीय खाने के प्रति निशा का रुझान बचपन से रहा।

ब्रिटेन में रह रहे भारतीय परिवारों से सीखा

वकालत के दिनों में भी निशा यूट्यूब पर भारतीय खाने से जुड़ा चैनल चलाती थीं। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय परिवारों से अलग-अलग तरह का खाना बनाना सीख कर उसका वीडियो वे इस चैनल पर अपलोड करती थीं।

मोगली की डिशेज घरेलू रेसिपी पर आधारित

निशा कहती हैं कि यह रेस्टोरेंट खोलने के पीछे उनका मकसद यह था कि वे दुनिया को दिखाएं कि भारतीय घर में और स्ट्रीट पर किस तरह का खाना खाते हैं। उनके रेस्टोरेंट की तमाम डिशेज घरेलू रेसिपी पर आधारित हैं। निशा भारतीय खाने पर तीन किताबें भी लिख चुकी हैं। पिंप माई राइस, द स्पाइस ट्री और मोगली स्ट्रीट फूड उन किताबों के नाम हैं।

किसी ने भरोसा नहीं था कि खाने का बिजनेस कामयाब होगा

निशा कहती हैं कि लोग भारत के बारे में कहते हैं कि वहां महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं मिलते हैं। लेकिन ब्रिटेन की स्थिति भी बहुत ज्यादा अलग नहीं है। जब उन्होंने रेस्टोरेंट शुरू करने का फैसला किया तो उन पर ऐसा न करने के लिए काफी दबाव डाला गया। परिवार के सदस्यों और दोस्तों को भी उम्मीद नहीं थी कि उनका बिजनेस सफल होगा।

 

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