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कोरोना काल में महंगी हुई साइकिल, 50 फीसदी तक बढ़ने की पीछे ये हैं 6 बड़ी वजहें

कोरोना काल में जब जिम बंद हुए तो लोगों ने फिट रहने के लिए साइकिल की तरफ रुख किया. लॉकडाउन की वजह से जब मजदूर फंस गए तो उन्होंने अपने गांव-शहर जाने के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल किया, लेकिन अब यह साइकिल की सवारी महंगी हो गई है. 1 साल में ही हर तरह की साइकिल के दामों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली के चांदनी चौक की साइकिल मार्केट की सबसे पुरानी दुकान के मालिक सुरेश गुप्ता ने बीते सालों में साइकिल इंडस्ट्री के उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा असर बीते एक साल में पड़ा है.

कोरोना काल में साइकिल की बिक्री तो बढ़ी लेकिन अब जब हालात सामान्य हुए हैं तो साइकिल के दाम दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं और महंगी साइकिल से ग्राहक मुंह फेर रहे हैं. महंगी हुई साइकिल के लिए सुरेश गुप्ता साइकिल बनाने वाली कंपनियों के एकाधिकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ साइकिल मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव बत्रा का मानना है कि स्टील, लोहा और प्लास्टिक के दाम बीते एक साल में काफी बढ़े हैं और इसी का असर साइकिल बाजार पर भी पड़ा है.

महंगी साइकिल के चलते दुकानदारों को ग्राहकों का मोल भाव झेलना पड़ रहा है. ग्राहक पुराने दाम पर ही साइकिल खरीदना चाहते हैं, लेकिन देश में बढ़ते दाम दुकानदारों के लिए भी समस्या बन चुके हैं. बाजार में सिर्फ फैंसी साइकिल ही महंगी नहीं हुईं, मजदूरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली सादा साइकिल के दामों में भी करीब 1000 का इजाफा हुआ है, जो सादा साइकिल आज से एक साल पहले 3500 की मिलती थी, वह अब करीब 4500 की हो चुकी है. कोरोना महामारी आने के बाद बाजार और व्यापारी तमाम मुसीबतें पहले से झेल रहे हैं, ऐसे में अगर गरीब की सवारी माने जाने वाली साइकिल भी महंगी हो जाएगी तो दुकानदारों को ग्राहक कम मिलेंगे और साइकिल चलाने वालों को दूसरे विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा.

बाजार में जाकर साइकिल की बढ़ी कीमतों की वजह

1- एक साल के भीतर लोहा 50 प्रति किलो से बढ़कर करीब 80 प्रति किलो तक पहुंचा.
2- स्टील और प्लास्टिक भी 1 साल में महंगा हुआ.
3- पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला गत्ता भी महंगा हुआ.
4- डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई के खर्चे में बढ़ोतरी हुई.
5- कोरोना काल में साइकिल की डिमांड बढ़ी लेकिन सप्लाई कम है.
6- गिनी-चुनी साइकिल निर्माता कंपनियों के होने के चलते कंपनियों का एकाधिकार और मनमानी है.

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